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रविवार, 1 नवंबर 2026
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पंजाब सरकार के ‘युद्ध नशे के विरुद्ध’ अभियान के तहत हरदोखानपुर में नशा विरोधी जागरूकता सेमिनार आयोजित

नशा प्रभावित व्यक्तियों के लिए सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में मुफ्त इलाज और पुनर्वास की सुविधा उपलब्धहोशियारपुर,(राजदार टाइम्स): पंजाब सरकार की ओर से प्रदेश को नशा मुक्त बनाने के उद्देश्य से चलाए जा…

पंजाब सरकार के ‘युद्ध नशे के विरुद्ध’ अभियान के तहत हरदोखानपुर में नशा विरोधी जागरूकता सेमिनार आयोजित
पंजाब सरकार के ‘युद्ध नशे के विरुद्ध’ अभियान के तहत हरदोखानपुर में नशा विरोधी जागरूकता सेमिनार आयोजित

नशा प्रभावित व्यक्तियों के लिए सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में मुफ्त इलाज और पुनर्वास की सुविधा उपलब्ध
होशियारपुर,(राजदार टाइम्स): पंजाब सरकार की ओर से प्रदेश को नशा मुक्त बनाने के उद्देश्य से चलाए जा रहे अभियान ‘युद्ध नशे के विरुद्ध’ अभियान के तहत जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की ओर से नशे के खिलाफ जागरूकता गतिविधियां लगातार संचालित की जा रही हैं। इसी कड़ी में डिप्टी कमिश्नर आशिका जैन के दिशा-निर्देशों पर जिला नशा मुक्ति एवं पुनर्वास केंद्र होशियारपुर की ओर से गांव हरदोखानपुर स्थित भगवान वाल्मीकि मंदिर में नशे के दुष्प्रभावों और इसके उपचार संबंधी जागरूकता सेमिनार आयोजित किया गया। सेमिनार में जिला नशा मुक्ति एवं पुनर्वास केंद्र के काउंसलर प्रशांत आदिया, काउंसलर परमिंदर कौर और स्टाफ नर्स तरुण गिल विशेष रूप से उपस्थित रहे। इस दौरान गांव के गणमान्य व्यक्तियों, शिक्षकों और बड़ी संख्या में बच्चों ने भी भाग लिया। काउंसलर प्रशांत आद्या ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि नशे की लत व्यक्ति के शारीरिक, मानसिक, सामाजिक और आर्थिक जीवन को बुरी तरह प्रभावित करती है। नशा केवल एक बुरी आदत नहीं, बल्कि एक बीमारी है, जिसका समय पर उचित चिकित्सकीय उपचार और काउंसलिंग से इलाज संभव है। उन्होंने नशे की समस्या से जूझ रहे लोगों को विशेषज्ञ डॉक्टरों की सलाह लेकर उपचार करवाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने बताया कि पंजाब सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की ओर से नशा मुक्ति उपचार की सुविधाएं मुफ्त उपलब्ध करवाई जा रही हैं।

काउंसलर परमिंदर कौर ने कहा कि नशाखोरी एक गंभीर सामाजिक और मानसिक स्वास्थ्य समस्या है, जिसका प्रभाव नशा करने वाले व्यक्ति के साथ-साथ उसके परिवार और पूरे समाज पर पड़ता है। उन्होंने युवाओं को तंबाकू और सिगरेट सहित हर प्रकार के नशे से दूर रहने की अपील करते हुए कहा कि तंबाकू के सेवन से कैंसर, हृदय रोग और फेफड़ों संबंधी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ता है। उन्होंने कहा कि नशे से प्रभावित व्यक्तियों के प्रति नफरत या भेदभाव करने के बजाय उन्हें उपचार और काउंसलिंग के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए। परिवार का सहयोग भी नशा मुक्ति की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। काउंसलर प्रशांत आदिया ने टेली-मानस सेवा की जानकारी देते हुए बताया कि मानसिक तनाव, चिंता, अवसाद और नशे संबंधी परामर्श के लिए 24 घंटे चलने वाली मुफ्त हेल्पलाइन 14416 और 1800-89-14416 पर संपर्क किया जा सकता है। इसके अलावा जिला स्तर पर सहायता के लिए 85580-01882 हेल्पलाइन नंबर उपलब्ध है। उन्होंने बताया कि सिविल अस्पताल होशियारपुर और सब-डिवीजनल सिविल अस्पताल दसूहा में नशा मुक्ति केंद्र संचालित किए जा रहे हैं, जहां नशे से प्रभावित मरीजों का 15 से 21 दिनों तक डिटॉक्सीफिकेशन उपचार किया जाता है। इसके बाद जरूरत के अनुसार मरीजों को सरकारी पुनर्वास केंद्र, मोहल्ला फतेहगढ़, होशियारपुर में 90 दिनों के लिए दाखिल कर उपचार और पुनर्वास सेवाएं प्रदान की जाती हैं।

उन्होंने बताया कि पुनर्वास केंद्र में जिला प्रशासन और रेडक्रॉस के सहयोग से मरीजों को व्यावसायिक कौशल विकास कार्यक्रमों के तहत विभिन्न हुनर सिखाने वाले प्रशिक्षण कोर्स भी करवाए जाते हैं, ताकि उपचार के बाद वे आत्मनिर्भर होकर समाज की मुख्यधारा में लौट सकें। उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य विभाग की ओर से जिला, सब-डिवीजन और सीएचसी स्तर पर ओओएटी क्लीनिक संचालित किए जा रहे हैं, जहां मरीज और परिवार की लिखित सहमति के बाद दवा आधारित उपचार उपलब्ध करवाया जाता है। वहीं, नेशनल एड्स कंट्रोल प्रोग्राम के तहत संचालित ओएसटी केंद्रों में इंजेक्शन के माध्यम से नशा करने वाले व्यक्तियों के लिए विशेष उपचार एवं सहायता सेवाएं उपलब्ध हैं। सेमिनार के अंत में स्टाफ नर्स तरुण गिल ने उपस्थित लोगों को नशे से दूर रहने और समाज को नशा मुक्त बनाने में अपना योगदान देने की शपथ दिलाई।

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