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रविवार, 1 नवंबर 2026
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अहोई अष्टमी का संदेश, संतान का वास्तविक संरक्षण अच्छे संस्कार और आध्यात्मिक ज्ञान में निहित : साध्वी दीपिका भारती

दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान के साप्ताहिक सत्संग में मातृ प्रेम, गुरु वात्सल्य और ब्रह्मज्ञान के महत्व पर डाला प्रकाशहोशियारपुर,(राजदार टाइम्स): दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान (डीजेजेएस) के स्थानीय…

अहोई अष्टमी का संदेश, संतान का वास्तविक संरक्षण अच्छे संस्कार और आध्यात्मिक ज्ञान में निहित : साध्वी दीपिका भारती
अहोई अष्टमी का संदेश, संतान का वास्तविक संरक्षण अच्छे संस्कार और आध्यात्मिक ज्ञान में निहित : साध्वी दीपिका भारती

दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान के साप्ताहिक सत्संग में मातृ प्रेम, गुरु वात्सल्य और ब्रह्मज्ञान के महत्व पर डाला प्रकाश
होशियारपुर,(राजदार टाइम्स): दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान (डीजेजेएस) के स्थानीय आश्रम गौतम नगर में साप्ताहिक आध्यात्मिक सत्संग समारोह श्रद्धा एवं भक्ति भाव से आयोजित किया गया। संस्थान के संस्थापक एवं संचालक सर्वश्री आशुतोष महाराज की शिष्या साध्वी सुश्री दीपिका भारती ने अपने ओजस्वी प्रवचनों के माध्यम से संगत को आध्यात्मिक जीवन के महत्व से अवगत करवाया। अहोई अष्टमी के पावन अवसर पर साध्वी जी ने पर्व से जुड़ी पारंपरिक लोक कथाओं एवं ऐतिहासिक संदर्भों की व्याख्या करते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति के प्रत्येक पर्व के पीछे कोई न कोई गहरा आध्यात्मिक एवं नैतिक संदेश छिपा होता है। अहोई अष्टमी का पर्व निस्वार्थ मातृ प्रेम, त्याग, समर्पण और संतान के कल्याण की मंगल कामना का प्रतीक है।

उन्होंने कहा कि एक मां सदैव अपनी संतान के सुख, सुरक्षा और दीर्घायु के लिए समर्पित रहती है, लेकिन संतान का वास्तविक संरक्षण केवल शारीरिक सुख-सुविधाओं तक सीमित नहीं होना चाहिए। साध्वी ने कहा कि माता यशोदा का वात्सल्य और माता जीजाबाई का प्रेरणादायी मातृत्व इस बात के उदाहरण हैं कि जब संतान को उच्च नैतिक एवं आध्यात्मिक संस्कारों से सींचा जाता है, तभी समाज को महान व्यक्तित्व प्राप्त होते हैं। आज की आधुनिक माताएं बच्चों के भौतिक सुख-सुविधाओं और करियर को लेकर चिंतित रहती हैं, जबकि उनके चरित्र निर्माण और विचारों की शुद्धता पर भी विशेष ध्यान देना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि वर्तमान भौतिकवादी युग में युवा पीढ़ी को तनाव, भटकाव और नैतिक पतन से बचाने के लिए केवल उपदेश देना पर्याप्त नहीं है। इसके लिए आध्यात्मिक ज्ञान और सद्गुरु का मार्गदर्शन अत्यंत आवश्यक है।

जिस प्रकार मां अपनी संतान के शारीरिक पोषण का ध्यान रखती है, उसी प्रकार पूर्ण सद्गुरु अपने शिष्य के आत्मिक पोषण और सर्वांगीण विकास का दायित्व निभाते हैं। गुरु अपने शिष्य के भीतर छिपे दुर्गुणों को दूर कर उसके चरित्र को सुदृढ़ बनाते हैं तथा उसे जीवन के सही मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं। साध्वी ने आगे कहा कि सर्व श्री आशुतोष महाराज जी के मार्गदर्शन में दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान ब्रह्मज्ञान की सनातन विद्या को जन-जन तक पहुंचाने का कार्य कर रहा है। ब्रह्मज्ञान अर्थात आत्मज्ञान की प्राप्ति से मनुष्य के भीतर विवेक जागृत होता है और उसके जीवन में सद्गुणों एवं संस्कारों का विकास होता है।

उन्होंने कहा कि गुरु का दिव्य वात्सल्य और आत्मज्ञान का प्रकाश ही एक चरित्रवान, संस्कारी एवं सशक्त भावी पीढ़ी के निर्माण का आधार बन सकता है। समारोह के समापन पर संगत ने ब्रह्मज्ञान आधारित ध्यान साधना में लीन होकर आध्यात्मिक शांति एवं आत्मिक आनंद की अनुभूति की।

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