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सोमवार, 2 नवंबर 2026
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यूरोप में युवाओं का विरोध जारी: फ्रांस से जर्मनी तक प्रदर्शन और हिंसा

यूरोप में फ्रांस से जर्मनी तक युवाओं के विरोध प्रदर्शन बढ़े हैं, फ्रैंकफर्ट में हथियार लूटने की घटनाएं भी हुईं।

यूरोप में युवाओं का विरोध जारी: फ्रांस से जर्मनी तक प्रदर्शन और हिंसा

पेरिस और फ्रैंकफर्ट में युवाओं ने शिक्षा, महंगाई और जलवायु संकट के खिलाफ व्यापक प्रदर्शन किए हैं। फ्रांस में लगातार तीसरे शनिवार हजारों लोग सड़कों पर उतरे, जबकि जर्मनी के 30 शहरों में हिंसक विरोध हुआ। फ्रैंकफर्ट में कुछ उपद्रवियों ने दुकानों में तोड़फोड़ की और एक बंदूक की दुकान से हथियार भी लूटे गए।

फ्रांस में हैलोवीन पर शांतिपूर्ण लेकिन सख्त सुरक्षा के बीच प्रदर्शन

फ्रांस में हैलोवीन के दिन लगभग 3.20 लाख लोगों ने प्रदर्शन में भाग लिया। प्रदर्शनकारी डरावनी पोशाक पहनकर सरकार की नीतियों के खिलाफ नारेबाजी कर रहे थे। गृह मंत्री लारेंट नुनेज ने बताया कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए करीब 70 हजार सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया था। हालांकि, देर शाम कुछ जगहों पर तनाव बढ़ा और पुलिस ने आंसू गैस व स्टन ग्रेनेड का इस्तेमाल किया। 560 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

जर्मनी में 30 शहरों में व्यापक युवा आंदोलन और हिंसा

जर्मनी में 'जेन-जी रीगेल्ट' नारे के साथ 30 शहरों में प्रदर्शन हुए। युवा शिक्षा, स्वास्थ्य, महंगाई और जलवायु संरक्षण की मांग कर रहे थे। फ्रैंकफर्ट में 17 दुकानों में तोड़फोड़ हुई, जिसमें एक बंदूक की दुकान से हथियार भी लूटे गए। पुलिस ने सभी हथियार जब्त करने का दावा किया है। हिंसा में 100 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हुए। कोलोन और हैंबर्ग में भी प्रदर्शनकारियों ने पत्थर, पेट्रोल बम और पटाखे फेंके। पुलिस ने आंसू गैस और पानी की बौछार से हालात नियंत्रण में किए।

पुर्तगाल और नीदरलैंड में भी विरोध प्रदर्शन

पूरे यूरोप में विरोध प्रदर्शन सीमित नहीं रहे। पुर्तगाल की राजधानी लिस्बन में हजारों लोग सड़कों पर उतरे। वहां पुलिस ने रोसियो स्क्वायर में लगे 50 से अधिक टेंट हटा दिए और लाठीचार्ज किया। गिरफ्तारियों की भी खबरें आईं। नीदरलैंड में हजारों युवाओं ने सरकार के खिलाफ शांतिपूर्ण प्रदर्शन किए। वहां पुलिस की कड़ी निगरानी के कारण हिंसा नहीं हुई।

आर्थिक और सामाजिक संकट युवाओं की नाराजगी का मुख्य कारण

यूरोप के विभिन्न देशों में हो रहे इन प्रदर्शन के पीछे महंगे मकान, बढ़ता किराया, शिक्षा व रोजगार की समस्याएं हैं। साथ ही स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच और जलवायु परिवर्तन के मुद्दे भी युवाओं को प्रभावित कर रहे हैं। जर्मनी में अनिवार्य सैन्य सेवा को दोबारा लागू करने की योजना ने भी विरोध बढ़ाया है। इन आंदोलनों से यूरोपीय सरकारों को युवाओं की मांगों पर ध्यान देने की चुनौती मिली है। फिलहाल, फ्रांस और जर्मनी की घटनाओं ने दिखाया है कि युवा अब अपनी समस्याओं को लेकर सड़कों पर आवाज उठा रहे हैं।

स्रोत: deshbandhu.co.in

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