प्रकृति प्रेमी समाजसेवक ने सरकार से की अपील, पशुओं को भी धरती पर स्वतंत्रता और सम्मानपूर्वक जीने का मिले अधिकार
दसूहा,(राजदार टाइम्स): बेजुबान पशुओं के साथ हिंसा करना महापाप है, क्योंकि ये मूक जीव अपनी पीड़ा किसी के सामने बयां तक नहीं कर सकते। चोट लगने पर भी ये अपने लिए न्याय की मांग नहीं कर पाते, बल्कि चुपचाप दर्द सहते रहते हैं। हमें यह समझना चाहिए कि जिस प्रकार इंसान को इस धरती पर जीने का अधिकार है, उसी प्रकार पशु-पक्षियों को भी स्वतंत्रता और सुरक्षित जीवन जीने का पूरा अधिकार है। इन विचारों का प्रकटावा करते हुए प्रकृति प्रेमी एवं समाजसेवक विजय राणा घगवाल ने कहा कि ब्रह्मांड की अदृश्य शक्ति, जिसे हम परमात्मा के नाम से जानते हैं, प्रत्येक जीव के कर्मों का हिसाब रखती है। परमात्मा की नजर में सभी जीव समान हैं और बेजुबान प्राणियों की पीड़ा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि कर्मफल का सिद्धांत हमें सिखाता है कि किसी भी जीव को दिया गया दर्द कभी व्यर्थ नहीं जाता। इसलिए मनुष्य को अपने व्यवहार में दया, करुणा और संवेदनशीलता अपनानी चाहिए। विजय राणा घगवाल ने सरकार से अपील की कि पशुओं पर होने वाले अमानवीय अत्याचारों को रोकने के लिए पशु क्रूरता एवं हिंसा संबंधी कानूनों को और अधिक मजबूत तथा प्रभावशाली बनाया जाए। इसके साथ ही कानून का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए, ताकि बेजुबान जीवों के साथ अत्याचार करने वालों के विरुद्ध उचित कार्रवाई हो सके। उन्होंने समाज के लोगों से भी अपील की कि पशुओं के प्रति दया और प्रेम की भावना अपनाएं तथा बच्चों और युवाओं को भी जीव-जंतुओं की रक्षा के प्रति जागरूक करें। उन्होंने कहा कि यह धरती हम सभी की मां है और इस पर रहने वाले प्रत्येक जीव को आजादी, सुरक्षा और सम्मान के साथ जीने का अधिकार है।
बेजुबान पशुओं पर अत्याचार करना महापाप, पशु हिंसा रोकने के लिए कानून हो सख्त : विजय राणा घगवाल
प्रकृति प्रेमी समाजसेवक ने सरकार से की अपील, पशुओं को भी धरती पर स्वतंत्रता और सम्मानपूर्वक जीने का मिले अधिकारदसूहा,(राजदार टाइम्स): बेजुबान पशुओं के साथ हिंसा करना महापाप है, क्योंकि ये मूक जीव…



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