कहा, स्कूल वह नींव है जिस पर पूरे देश का भविष्य टिका
दातारपुर,(एसपी शर्मा शास्त्री): तमसो मा ज्योतिर्गमय अर्थात हमें अंधकार से प्रकाश की ओर ले चलो। यह प्रार्थना किसी भी विद्यालय की आत्मा होती है। वशिष्ठ भारती इंटरनेशनल स्कूल दातारपुर में दो दिवसीय वार्षिक उत्सव में बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुई विधायक कर्मवीर सिंह घुम्मण की धर्मपत्नी प्रभजोत कौर ने अपने संबोधन में उक्त चर्चा करते हुए कहा कि प्राचीन काल से ही हमारे समाज में विद्यालय को एक पवित्र स्थान माना गया है। जिस प्रकार एक भक्त शांति और ईश्वर की खोज में मंदिर जाता है, उसी प्रकार एक छात्र ज्ञान, संस्कार और विद्या प्राप्त करने के लिए स्कूल जाता है। इसलिए, स्कूल को वास्तव में ज्ञान का मंदिर कहा जाता है। प्रभजोत कौर ने कहा कि विद्यालय और मंदिर में गहरी समानता होती है। मंदिर में हम भगवान की पूजा करते हैं, जबकि विद्यालय में हम सरस्वती ज्ञान की देवी की साधना करते हैं। प्रभजोत कौर ने कहा कि स्कूल हमें अज्ञानता के गहरे अंधकार से बाहर निकालता है। यह हमारे दिमाग को खोलता है और हमें सही-गलत का अंतर सिखाता है।

उन्होंने कहा मंदिर और गुरुद्वारे में जैसे पुजारी हमें भगवान से जोड़ते हैं, वैसे ही स्कूल में शिक्षक हमारे मार्गदर्शक बनते हैं। गुरु का स्थान ईश्वर से भी ऊंचा माना गया है क्योंकि वे ही हमें जीवन जीने की कला सिखाते हैं। गुरुद्वारे और मंदिर में हर अमीर-गरीब एक साथ सिर झुकाता है। ठीक वैसे ही, स्कूल की यूनीफॉर्म पहनकर हर बच्चा एक समान हो जाता है। यहाँ जाति, धर्म या आर्थिक स्थिति के आधार पर कोई भेदभाव नहीं होता। उन्होंने कहा कि स्कूल केवल किताबों को रटने की जगह नहीं है। यह वह स्थान है जहाँ बच्चे का चरित्र निर्माण होता है। स्कूल में छात्र अनुशासन और समय का महत्व सीखते हैं।
एक-दूसरे की मदद करना और टीम वर्क सीखते हैं...
देशभक्ति, ईमानदारी और नैतिक मूल्यों को अपनाते हैं...
उन्होंने कहा कि आज के आधुनिक युग में भले ही पढ़ाई के तौर-तरीके बदल गए हों, लेकिन स्कूल का महत्व कम नहीं हुआ है। स्कूल वह नींव है जिस पर पूरे देश का भविष्य टिका होता है। यह एक ऐसा पवित्र स्थान है जो एक अबोध बालक को समाज का जिम्मेदार और महान नागरिक बनाता है। सचमुच, स्कूल केवल ईंट-पत्थर की इमारत नहीं, बल्कि इंसानों को गढऩे वाला पवित्र मंदिर है। इस अवसर पर उन्हें सम्मानित किया गया।



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