राजस्थान के झालावाड़ जिले के भवानीमंडी इलाके में पुलिस ने एक वेश्यावृत्ति रैकेट का भंडाफोड़ करते हुए छह नाबालिग लड़कियों को बचाया है। यह कार्रवाई 7 अक्टूबर को मिली गुप्त शिकायत के बाद शुरू हुई जांच में हुई।
रैकेट का खुलासा और बचाए गए बच्चे
पुलिस ने बताया कि यह रैकेट पारंपरिक बस्तियों (डेरों) की आड़ में चल रहा था। जांच में पता चला कि कुछ परिवार अपनी नाबालिग बेटियों को देह व्यापार के लिए मजबूर कर रहे थे। 12 से 17 वर्ष की छह लड़कियों को बचाया गया है और पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें पीड़ितों की माताएं और कथित बिचौलिए शामिल हैं।
मेडिकल जांच में पुष्टि हुई कि पांच बच्चियों के साथ बार-बार यौन शोषण हुआ था, जबकि दो लड़कियों में यौन संचारित संक्रमण (एसटीआई) पाए गए।
विशेष जांच दल और छापेमारी
एसपी अमित बुढानिया के मुताबिक, प्रोबेशनरी आईपीएस अधिकारी आयुष श्रोत्रिय के नेतृत्व में एक विशेष जांच दल (एसआईटी) बनाया गया। एसआईटी ने गुप्त रूप से बस्तियों में दो सदस्यों को तैनात किया, जिन्होंने डिजिटल सबूत जुटाए।
सभी सबूतों के आधार पर पुलिस ने 15 टीमों के साथ एक साथ छापेमारी की। फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (एफएसएल) ने भी मौके से आपत्तिजनक सामग्री जब्त की और जांच के लिए जरूरी डीएनए नमूने लिए। चार मामलों में मिश्रित पुरुष डीएनए पाया गया, जो जांच के लिए महत्वपूर्ण है।
कानूनी कार्रवाई और पुनर्वास
पुलिस ने इम्मोरल ट्रैफिक (प्रिवेंशन) एक्ट की धाराओं 3, 4, 5 और पोक्सो एक्ट की धाराओं 5/6, 11/12, 17 के तहत मामला दर्ज किया है। बचाई गई लड़कियों को बालिका आश्रय गृह में रखा गया है जहां उनकी सुरक्षा और पुनर्वास की व्यवस्था है।
पांच आरोपियों को पुलिस हिरासत में लेकर तीन दिन की रिमांड पर रखा गया है। पुलिस इस रैकेट के पूरे दायरे की जांच कर रही है और अन्य संदिग्धों की पहचान के लिए प्रयास जारी हैं।
मुख्य तथ्य
- छह नाबालिग लड़कियों को वेश्यावृत्ति रैकेट से बचाया गया।
- पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर तीन दिन की रिमांड पर रखा गया।
- मेडिकल जांच में पांच लड़कियों के साथ यौन शोषण की पुष्टि हुई।
- फोरेंसिक जांच में पुरुषों का मिश्रित डीएनए मिला।
- बच्चियों को बालिका आश्रय गृह में पुनर्वास के लिए भेजा गया।
स्रोत: deshbandhu.co.in



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