श्री गुरु रविदास जी के 650वें प्रकाश पर्व को समर्पित संगोष्ठी में विद्वानों ने रखे विचार, पंजाबी भाषा और साहित्यिक विरासत को बढ़ावा देने पर दिया जोर
मुकेरियां, (राजदार टाइम्स): पंजाबी भाषा, साहित्य एवं सांस्कृतिक विरासत के प्रचार-प्रसार तथा साहित्यिक गतिविधियों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से स्वामी प्रेमानंद महाविद्यालय (एस.पी.एन. कॉलेज), मुकेरियां में तीन दिवसीय ‘कंडी ब्यास साहित्य उत्सव’ का भव्य शुभारंभ हुआ। पंजाबी साहित्य अकादमी, लुधियाना, कॉलेज के स्नातकोत्तर पंजाबी विभाग तथा पंजाबी साहित्य सभा (रजि.), मुकेरियां के संयुक्त सहयोग से आयोजित इस उत्सव के पहले दिन श्री गुरु रविदास जी के 650वें प्रकाश पर्व को समर्पित विशेष संगोष्ठी करवाई गई। कार्यक्रम के दौरान पंजाबी विभाग की अध्यक्ष डॉ. किरनजीत कौर ने स्वागत भाषण प्रस्तुत करते हुए विभाग की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि एवं साहित्यिक गतिविधियों की जानकारी दी। उन्होंने समारोह में पहुंचे अतिथियों, विद्वानों एवं साहित्य प्रेमियों का स्वागत किया।
कॉलेज प्राचार्य डॉ. समीर शर्मा ने उद्घाटन भाषण में कहा कि साहित्यिक आयोजन नई पीढ़ी को अपनी मातृभाषा, साहित्य और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का सशक्त माध्यम हैं। ऐसे कार्यक्रम विद्यार्थियों में साहित्यिक रुचि एवं रचनात्मक सोच विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उद्घाटन सत्र में महंत श्री रमेश दास जी (सदस्य, प्रबंधकीय समिति, एस.पी.एन. कॉलेज) ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। उन्होंने श्री गुरु रविदास जी की वाणी एवं विचारधारा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि गुरु साहिब ने समूची मानवता को समानता, प्रेम और आपसी भाईचारे का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि साहित्य किसी भी समाज की ऐतिहासिक स्मृति, सांस्कृतिक विरासत और भाषाई पहचान को सुरक्षित रखने का महत्वपूर्ण माध्यम है। डॉ.राजेश लखनपाल (ऑडिटर, प्रबंधकीय समिति) ने विशेष अतिथि के रूप में अपने विचार रखते हुए कहा कि गुरु रविदास जी की वाणी जाति-पाति और सामाजिक भेदभाव से ऊपर उठकर समानता, मानवता एवं नैतिक मूल्यों को अपनाने की प्रेरणा देती है। साहित्य व्यक्ति को अपनी जड़ों और सामाजिक मूल्यों से जोड़कर उसकी सोच को नई दिशा प्रदान करता है। इस अवसर पर कवि एवं चिंतक प्रिंसिपल नवतेज गढ़दीवाला ने शोध-पत्र प्रस्तुत करते हुए गुरु रविदास जी की विचारधारा, सामाजिक चेतना और मानवतावादी दृष्टिकोण पर विस्तार से चर्चा की। इसके बाद डॉ. गुरनाम सिंह चनौर ने भी अपना शोध-पत्र प्रस्तुत किया। शैक्षणिक सत्र में मुख्य अतिथि डॉ. जसवंत राय (शोध अधिकारी, कार्यालय जिला भाषा अधिकारी, होशियारपुर) ने गुरु रविदास जी के दर्शन एवं विचारधारा की वर्तमान सामाजिक परिस्थितियों में प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने गुरु साहिब की वाणी के उदाहरणों के माध्यम से उनके विचारों के सार्वकालिक महत्व को समझाया। सत्र की अध्यक्षता प्रो. जगदीश सिंह (निदेशक, नाद प्रगास, श्री अमृतसर) ने की। उन्होंने गुरु रविदास जी की वाणी का विभिन्न दृष्टिकोणों से गहन शोध करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि गुरु साहिब की विचारधारा को समझने के लिए भारतीय सामाजिक एवं सांस्कृतिक परिस्थितियों के अनुरूप नई सैद्धांतिक शब्दावली विकसित करना जरूरी है।
अंत में पंजाबी साहित्य सभा (रजि.), मुकेरियां के अध्यक्ष डॉ. सरबजोत सिंह ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया। उन्होंने मुख्य अतिथियों, शोध-पत्र प्रस्तुत करने वाले विद्वानों और साहित्य प्रेमियों का आभार व्यक्त करते हुए कार्यक्रम की सफलता के लिए कॉलेज प्राचार्य डॉ. समीर शर्मा, प्रबंधकीय समिति एवं सभी सहयोगियों के योगदान की सराहना की। तीन दिवसीय यह साहित्य उत्सव पंजाबी भाषा, साहित्य, संस्कृति और गुरु साहिबान की विचारधारा के प्रचार-प्रसार की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हो रहा है।
एसपीएन कॉलेज में तीन दिवसीय ‘कंडी ब्यास साहित्य उत्सव’ का आगाज
श्री गुरु रविदास जी के 650वें प्रकाश पर्व को समर्पित संगोष्ठी में विद्वानों ने रखे विचार, पंजाबी भाषा और साहित्यिक विरासत को बढ़ावा देने पर दिया जोरमुकेरियां, (राजदार टाइम्स): पंजाबी भाषा, साहित्य…



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