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मंगलवार, 3 नवंबर 2026
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रमा एकादशी 2026: व्रत नियम और पूजा के महत्वपूर्ण निर्देश

रमा एकादशी 2026 का व्रत 5 नवंबर को रहेगा, जिसमें भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा के साथ कुछ नियमों का पालन जरूरी है।

रमा एकादशी 2026: व्रत नियम और पूजा के महत्वपूर्ण निर्देश

कार्तिक महीने में आने वाली रमा एकादशी 2026 का व्रत 5 नवंबर को रखा जाएगा। यह व्रत भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की कृपा पाने का महत्वपूर्ण अवसर माना जाता है। इस दिन व्रत और पूजा के दौरान कुछ नियमों का पालन करना जरूरी है, जबकि कुछ कार्यों से बचना चाहिए।

रमा एकादशी 2026 की तिथि और व्रत समय

पंचांग के अनुसार, एकादशी तिथि 4 नवंबर 2026 को सुबह 11:03 बजे शुरू होकर 5 नवंबर को सुबह 10:35 बजे समाप्त होगी। उदया तिथि के नियम के अनुसार, रमा एकादशी का व्रत 5 नवंबर को रखा जाएगा। व्रत का पारण 6 नवंबर 2026 को सुबह 6:37 बजे से 8:48 बजे के बीच किया जा सकता है।

रमा एकादशी पर क्या करें?

इस दिन भगवान विष्णु की विशेष पूजा-अर्चना और मंत्र जाप करना शुभ माना जाता है। भगवान विष्णु के केशव स्वरूप की पूजा के दौरान पीले फूल, फल, धूप, दीप और तुलसी दल अर्पित करें। माता लक्ष्मी की भी विधिवत पूजा करनी चाहिए, जिससे घर में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है।

तुलसी दल का विशेष महत्व है। तुलसी के पत्ते एकादशी से पहले तोड़कर रख लें, क्योंकि एकादशी के दिन तुलसी के पत्ते तोड़ना उचित नहीं माना जाता। साथ ही, भगवान विष्णु के मंत्र जैसे 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' का जाप और विष्णु सहस्रनाम का पाठ करना फलदायी होता है।

जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र, फल और अन्य आवश्यक वस्तुएं दान करना भी पुण्य का कार्य माना जाता है।

रमा एकादशी पर किन बातों का ध्यान रखें?

इस दिन चावल का सेवन वर्जित है क्योंकि इससे व्रत का पुण्य प्रभावित हो सकता है। साथ ही, मांस, मछली, अंडा, लहसुन और प्याज जैसे तामसिक भोजन से परहेज करें। शुद्ध सात्विक भोजन करने और मन को शांत रखने की सलाह दी जाती है।

तुलसी के पत्ते एकादशी के दिन न तोड़ें और पूजा के लिए पहले से ही तुलसी दल तैयार रखें। तुलसी के पौधे की पूजा और श्रद्धा बनाए रखना जरूरी है।

रमा एकादशी का धार्मिक महत्व

रमा एकादशी कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष में आती है और इसे अत्यंत पुण्यदायी व्रत माना गया है। इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, यह व्रत पापों से मुक्ति दिलाता है और भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

स्रोत: tv9hindi.com

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