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शनिवार, 31 अक्टूबर 2026
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पौंग झील में मछली उत्पादन बढ़ाने के लिए डाला बीज, रोहू मछली के सबसे ज्यादा बीज डाले

तलवाड़ा,(एसपी शर्मा शास्त्री): ब्यास नदी पर बने पौंग बांध स्थित महाराणा प्रताप सागर झील में पौंग मछली उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए मत्स्य विभाग ने विभिन्न प्रजातियों की मछलियों का बीज डाला है। इस…

पौंग झील में मछली उत्पादन बढ़ाने के लिए डाला बीज, रोहू मछली के सबसे ज्यादा बीज डाले
पौंग झील में मछली उत्पादन बढ़ाने के लिए डाला बीज, रोहू मछली के सबसे ज्यादा बीज डाले

तलवाड़ा,(एसपी शर्मा शास्त्री): ब्यास नदी पर बने पौंग बांध स्थित महाराणा प्रताप सागर झील में पौंग मछली उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए मत्स्य विभाग ने विभिन्न प्रजातियों की मछलियों का बीज डाला है। इस दौरान जलाशय में कुल 11.96 लाख बीज डाले गए, जबकि 17 लाख बीज डालने का लक्ष्य रखा गया है। इस खेप में रोहू मछली के बीज की संख्या सबसे अधिक रही। यह जानकारी सहायक मत्स्य निर्देशक संदीप कुमार ने राजदार टाइम्स से बातचीत करते हुए दी। विभाग ने पौंग झील में मछलियों की उपलब्धता बढ़ाने एवं मत्स्य पालन से जुड़े लोगों की आजीविका को मजबूती देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। बीज संचयन की इस प्रक्रिया के दौरान बीज संचयन समिति के सदस्य, मत्स्य विभाग के कर्मचारी तथा मत्स्य सहकारी सभाओं के सदस्य मौजूद रहे। इस कार्यक्रम में विभागीय कर्मचारियों और समिति की भूमिका मछली के बीज को जलाशय में डालने की प्रक्रिया से जुड़ी रही। हालांकि उपलब्ध जानकारी में अधिकारियों के नाम और उनकी ओर से दिए गए किसी आधिकारिक बयान का उल्लेख नहीं है। इस बार उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 11.96 लाख मछली बीज का संचयन पूरा किया गया है। जब किसी 17 लाख बीज डालने का लक्ष्य रखा गया है। पौंग जलाशय में इस प्रकार का बीज संचयन मछलियों की प्राकृतिक उपलब्धता बढ़ाने, मत्स्य संसाधनों को मजबूत करने और स्थानीय मछुआरों की आय के अवसर बेहतर बनाने की दिशा में महत्त्वपूर्ण प्रयास है। अब इसकी सफलता इस बात पर भी निर्भर करेगी कि जलाशय में मछलियों को अनुकूल वातावरण मिले। पौंग झील रोहू के 7.25 लाख बीज डाले-मत्स्य विभाग से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार पौंग जलाशय के भीतर चार प्रमुख प्रजातियों का बीज डाला गया। इनमें ग्रास कार्प के 137484, रोहू के 725000, मृगल के 100000 और कतला के 333450 बीज शामिल हैं। इन सभी का जोड़ 1195934 बीज बनता है। इस प्रकार कुल बीज में राहू की हिस्सेदारी सबसे अधिक रही, जबकि कतला दूसरे स्थान पर रही।

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