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सोमवार, 2 नवंबर 2026
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गुजरात के स्कूलों में मानसिक स्वास्थ्य पर नया नियम लागू होगा

गुजरात में कक्षा 9 से 12 तक के स्कूलों में मानसिक स्वास्थ्य और आत्महत्या रोकथाम के लिए नया नियम लागू होगा।

गुजरात के स्कूलों में मानसिक स्वास्थ्य पर नया नियम लागू होगा

गुजरात सरकार ने विद्यार्थियों की परीक्षा के अंक के साथ-साथ उनकी मानसिक सेहत को भी प्राथमिकता देने वाला नया नियम लागू किया है। यह व्यवस्था 9 से 12वीं कक्षा तक के सभी स्कूलों में लागू होगी, जिसका उद्देश्य मानसिक तनाव, परीक्षा का दबाव और आत्महत्या जैसी घटनाओं को रोकना है।

गुजरात में कक्षा 9 से 12 तक के स्कूलों पर लागू नई व्यवस्था

मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के निर्देश पर शिक्षा विभाग ने गुजरात माध्यमिक एवं उच्चतर माध्यमिक शिक्षा विनियम, 1974 में संशोधन करते हुए मानसिक स्वास्थ्य और आत्महत्या रोकथाम के लिए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। यह नियम गुजरात माध्यमिक एवं उच्चतर माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (GSHSEB) से जुड़े सभी माध्यमिक और उच्चतर माध्यमिक स्कूलों पर लागू होगा।

स्कूल वेलनेस टीम का गठन आवश्यक

प्रत्येक स्कूल में "स्कूल वेलनेस टीम" (SWT) का गठन अनिवार्य होगा। इस टीम का उद्देश्य विद्यार्थियों में मानसिक तनाव, चिंता, अवसाद और आत्महत्या के शुरुआती संकेतों को पहचान कर उन्हें समय पर सहायता प्रदान करना है। प्राचार्य इस टीम के प्रमुख होंगे, जबकि काउंसलर या नियुक्त शिक्षक समन्वयक की भूमिका निभाएंगे। टीम में कक्षा 9-10 और 11-12 के एक-एक शिक्षक, स्कूल मैनेजमेंट कमेटी का प्रतिनिधि, दोनों स्तरों से एक-एक मनो-मित्र (पीयर मॉनिटर) और एक गैर-शैक्षणिक कर्मचारी भी शामिल होंगे। हर शैक्षणिक वर्ष की शुरुआत में टीम का गठन और उसकी वार्षिक समीक्षा अनिवार्य होगी।

मनो-मित्र व्यवस्था से विद्यार्थियों को भावनात्मक सहारा

विद्यार्थियों के भावनात्मक कल्याण के लिए "मनो-मित्र" की व्यवस्था की जाएगी। मनो-मित्र अपने सहपाठियों की समस्याओं को समझकर उन्हें प्रारंभिक भावनात्मक समर्थन देंगे। जरूरत पड़ने पर वे संबंधित शिक्षक, काउंसलर या मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से संपर्क कर मदद दिलाएंगे। यह पहल विद्यार्थियों के बीच विश्वास और सहयोग को बढ़ावा देगी ताकि वे अपनी समस्याएं अकेले न सहें।

काउंसलर और विशेषज्ञों की नियुक्ति

100 या उससे अधिक विद्यार्थियों वाले स्कूलों में कम से कम एक योग्य काउंसलर, मनोवैज्ञानिक या सामाजिक कार्यकर्ता नियुक्त करना अनिवार्य होगा, जिनके पास मानसिक स्वास्थ्य में प्रशिक्षण हो। 100 से कम विद्यार्थियों वाले स्कूलों को बाहरी मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और टेली-मानस सेवाओं के साथ रेफरल व्यवस्था स्थापित करनी होगी। बोर्ड परीक्षाओं और कक्षा प्रवेश के दौरान विद्यार्थियों को अतिरिक्त काउंसलिंग उपलब्ध कराई जाएगी।

रैगिंग, बुलिंग और भेदभाव के खिलाफ सख्ती

सभी स्कूलों में रैगिंग, शारीरिक या मानसिक प्रताड़ना, बुलिंग, साइबर बुलिंग तथा जाति, धर्म, लिंग आदि के आधार पर भेदभाव के खिलाफ गोपनीय शिकायत निवारण व्यवस्था बनाना अनिवार्य होगा। शिकायतों की निष्पक्ष और समय पर जांच करनी होगी। यदि किसी विद्यार्थी को गंभीर खतरा होने के बावजूद प्रशासन ने कार्रवाई नहीं की तो उस पर कानूनी और अनुशासनात्मक कार्रवाई हो सकती है। अब स्कूलों की जिम्मेदारी केवल अच्छे अंक दिलाना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को तनावमुक्त और सुरक्षित वातावरण देना भी होगी।

मुख्य बिंदु

  • गुजरात के 9 से 12वीं कक्षा के सभी स्कूलों में मानसिक स्वास्थ्य नियम लागू होंगे।
  • प्रत्येक स्कूल में "स्कूल वेलनेस टीम" का गठन अनिवार्य होगा।
  • 100 से अधिक विद्यार्थियों वाले स्कूलों में काउंसलर या मनोवैज्ञानिक नियुक्त करना होगा।
  • रैगिंग, बुलिंग और भेदभाव के खिलाफ सख्त शिकायत निवारण व्यवस्था लागू होगी।

स्रोत: livetimes.news

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