दिल्ली,(राजदार टाइम्स): इस साल धनतेरस 6 नवंबर, शुक्रवार को मनाया जाएगा। इस पावन अवसर पर नए बर्तन और धातु की चीजें खरीदने की परंपरा बहुत पुरानी है। लोग अक्सर पूछते हैं कि धनतेरस पर किस धातु के बर्तन खरीदने से सबसे अधिक शुभता आती है। इस दिन पीतल, चांदी और तांबे के बर्तन खरीदना शुभ माना जाता है। हालांकि स्टील के बर्तन भी रोजमर्रा के उपयोग के लिए खरीदे जाते हैं, वे पूरी तरह से प्राकृतिक धातु नहीं माने जाते। सही धातु के बर्तन खरीदने से घर में समृद्धि और खुशहाली आती है।
पीतल के बर्तन: पौराणिक महत्व
पीतल के बर्तन खरीदना धनतेरस पर बहुत शुभ माना जाता है। पौराणिक कथा के अनुसार, जब भगवान धन्वन्तरि समुद्र मंथन के बाद प्रकट हुए थे, उनके हाथ में सोने का कलश था। पीतल का रंग सोने जैसा पीला होता है इसलिए इसे सोने का रूप माना जाता है। इस धातु के बर्तन घर लाने से भगवान धन्वन्तरि की कृपा बनी रहती है और घर में सुख-समृद्धि आती है। इसलिए लोग पीतल के लोटे या अन्य बर्तन इस दिन खरीदकर अपने घर लाते हैं ताकि मां लक्ष्मी की कृपा बनी रहे।
चांदी के बर्तन और शीतलता
चांदी के बर्तन खरीदना भी धनतेरस पर शुभ माना जाता है। चांदी शीतलता और शांति का प्रतीक है, जो घर के वातावरण को शांत और खुशनुमा बनाता है। लोग इस दिन चांदी के छोटे बर्तन, चम्मच या सिक्के खरीदते हैं ताकि जीवन में सकारात्मकता बनी रहे। चांदी को चंद्रमा का प्रतिनिधि माना जाता है, जिससे घर में धन और वैभव की कमी नहीं होती। इसलिए चांदी के बर्तन इस त्योहार का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
तांबे के बर्तन और स्वास्थ्य लाभ
आयुर्वेद और वैदिक परंपरा के अनुसार, तांबा एक शुद्ध और स्वास्थ्यवर्धक धातु है। तांबे के बर्तन खरीदना भी धनतेरस पर शुभ माना जाता है क्योंकि इससे शरीर को स्वास्थ्य लाभ मिलते हैं। तांबे के बर्तन में पानी पीने या भोजन करने से शरीर की ऊर्जा बढ़ती है। इस धातु के बर्तन घर लाने से सदस्यों की सेहत बेहतर रहती है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। इसलिए लोग तांबे के लोटे या गिलास खरीदना पसंद करते हैं।
कौन सी धातुओं से बचें?
धनतेरस पर बर्तन खरीदते समय लोहे और एल्युमीनियम के बर्तनों से बचना चाहिए। इन धातुओं को इस दिन खरीदना अशुभ माना जाता है। हालांकि स्टील के बर्तन रोजमर्रा के उपयोग के लिए खरीदे जा सकते हैं, पर धार्मिक दृष्टि से पीतल, चांदी और तांबा ही सबसे उत्तम माने गए हैं। इन नियमों का पालन करने से त्योहार का पूर्ण लाभ मिलता है।
रजनी गुप्ता ने दिल्ली विश्वविद्यालय से संस्कृत में एम ए, एम फिल (ज्योतिष) की शिक्षा प्राप्त की है। वे भारतीय विद्या भवन से वास्तु शास्त्र में डिप्लोमा भी धारिणी हैं। 17 वर्षों से ज्योतिष से जुड़ी रजनी गुप्ता Astropatri.com से जुड़ी हैं और टैरो कार्ड व न्यूमरोलॉजी के माध्यम से मार्गदर्शन देती हैं।
स्रोत: tv9hindi.com



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