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शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2026
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सूडान-दक्षिण सूडान के विवादित अबेई क्षेत्र में बाजार पर ड्रोन हमला, 153 लोगों की मौत

हमले की चपेट में पास का ईंधन डिपो भी आया; दक्षिण सूडान ने सूडानी सेना को जिम्मेदार ठहराते हुए सूडान के राजदूत को तलब किया।

सूडान-दक्षिण सूडान के विवादित अबेई क्षेत्र में बाजार पर ड्रोन हमला, 153 लोगों की मौत
प्रतीकात्मक तस्वीर: अबेई क्षेत्र के कस्बे में झोपड़ीनुमा बस्ती का दृश्य (फोटो: Sudan Envoy, विकिमीडिया कॉमन्स, CC BY 2.0)

सूडान और दक्षिण सूडान के बीच विवादित सीमा क्षेत्र अबेई में एक बाजार पर हुए ड्रोन हमले में 153 लोगों की जान चली गई है। हमले की जद में पास में स्थित एक ईंधन डिपो भी आ गया, जिससे भीषण आग लग गई जो मंगलवार तक धधकती रही। अबेई प्रशासन के कार्यवाहक सूचना मंत्री योहाना अकोल नगोर ने समाचार एजेंसी एसोसिएटेड प्रेस को फोन पर इसकी पुष्टि की।

अकोल के अनुसार हमला सोमवार सुबह करीब 11 बजे अबेई शहर के उत्तर में स्थित अमीट बाजार पर हुआ। उन्होंने बताया कि आग के कारण मरने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है। जिस ईंधन डिपो को नुकसान पहुंचा, उससे स्थानीय कारोबारियों को ईंधन की आपूर्ति होती थी। अकोल ने इस हमले के लिए सूडान की सेना को जिम्मेदार ठहराया, हालांकि हमलावर की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है और हमले का मकसद भी तुरंत स्पष्ट नहीं हो पाया।

अस्पताल में गंभीर घायलों की भीड़

अंतरराष्ट्रीय चिकित्सा संस्था डॉक्टर्स विदाउट बॉर्डर्स (एमएसएफ) ने बताया कि 20 से अधिक घायलों को अमेथ बेक अस्पताल लाया गया, जहां उसकी टीमें दक्षिण सूडान के स्वास्थ्य मंत्रालय के कर्मचारियों के साथ काम कर रही हैं। संस्था के डॉ. क्रिश्चियन लिंडाउर ने कहा कि भर्ती कई मरीजों की हालत नाजुक है और कई लोग आग से झुलसे हैं। एमएसएफ ने सभी पक्षों से आम नागरिकों और नागरिक ढांचे पर हमले बंद करने की अपील की है।

दक्षिण सूडान के विदेश मंत्रालय ने भी हमले का आरोप सूडानी सेना पर लगाया और कहा कि बाजार के कई हिस्सों को निशाना बनाया गया। मंत्रालय ने विरोध दर्ज कराने के लिए सूडान के राजदूत को तलब किया और खार्तूम से ऐसी किसी भी कार्रवाई से बचने को कहा, जिससे नागरिकों की जान-माल खतरे में पड़े। साथ ही अबेई के मुद्दों का समाधान कूटनीतिक रास्ते से निकालने पर जोर दिया।

सूडान में अप्रैल 2023 से सेना और अर्धसैनिक बल रैपिड सपोर्ट फोर्सेज के बीच लड़ाई जारी है, जिसने देश के बड़े हिस्से को तबाह कर दिया है और सीमाओं पर अस्थिरता बढ़ाई है।

तेल संपदा से भरपूर अबेई का दर्जा 2005 के शांति समझौते के बाद भी तय नहीं हो सका था और 2011 में दक्षिण सूडान की आजादी के समय भी यह सवाल अनसुलझा रहा। यहां की बहुसंख्यक न्गोक दिन्का आबादी दक्षिण सूडान के साथ जाना चाहती है, जबकि पशु चराने आने वाले मिसेरिया खानाबदोश सूडान के पक्ष में हैं।

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