आर्थिक सहयोग और विकास संगठन (OECD) की नई रिपोर्ट में बताया गया है कि अमेरिका के 316 फिजिक्स के शुरुआती स्तर के छात्रों पर किए गए अध्ययन में AI ट्यूटर से पढ़ने वाले छात्रों ने पारंपरिक क्लासरूम के छात्रों की तुलना में कम समय में अधिक सीख हासिल की। यह शोध डिजिटल एजुकेशन आउटलुक 2026 रिपोर्ट का हिस्सा है।
AI ट्यूटर से सीखने की क्षमता और उत्साह बढ़ा
रिपोर्ट के अनुसार, AI ट्यूटर खासकर छात्रों की सीखने की क्षमता बढ़ाने और विषय को बेहतर समझाने के लिए डिजाइन किया गया है। इस अध्ययन में AI ट्यूटर से पढ़ने वाले छात्रों का पढ़ाई में जुड़ाव और मोटिवेशन पारंपरिक तरीकों से पढ़ने वाले छात्रों से बेहतर पाया गया। OECD ने 0.63 का प्रभाव दिखाने वाला परिणाम बड़ा माना है।
ट्यूटर कोपायलट से ट्यूटरों को मिल रही मदद
रिपोर्ट में स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के ‘ट्यूटर कोपायलट’ का उदाहरण दिया गया है, जो ऑनलाइन ट्यूटरों की सहायता करता है। अमेरिका में लगभग 900 ट्यूटरों ने इस AI टूल का इस्तेमाल कर 1,800 छात्रों को पढ़ाया। इस दौरान छात्रों की उपस्थिति दर में औसतन 4 प्रतिशत सुधार हुआ। खासकर कम अनुभव वाले ट्यूटरों के छात्रों की सफलता दर में 9 प्रतिशत और कम गुणवत्ता वाली रेटिंग पाने वाले ट्यूटरों के छात्रों की सफलता दर में 7 प्रतिशत सुधार दर्ज किया गया।
AI ट्यूटर का सही डिजाइन जरूरी
OECD रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि सामान्य चैटबॉट और AI ट्यूटर में अंतर है। सामान्य चैटबॉट केवल सवालों के जवाब देते हैं, जबकि विशेष रूप से तैयार AI ट्यूटर छात्रों को उनकी जरूरत के अनुसार जानकारी, उदाहरण और फीडबैक भी देते हैं। हालांकि, यह रिपोर्ट स्पष्ट करती है कि AI टीचर्स की जगह नहीं ले सकता बल्कि यह शिक्षकों और ट्यूटरों के काम को बेहतर बनाने में मदद करता है। AI की सफलता इसके सही डिजाइन और उपयोग पर निर्भर करती है।
इस अध्ययन से पता चलता है कि डिजिटल तकनीक और AI ट्यूटर के सही इस्तेमाल से शिक्षा में सुधार संभव है। यह छात्रों के लिए सीखने के नए अवसर खोलता है और शिक्षकों के लिए भी एक सहायक उपकरण साबित हो सकता है।
स्रोत: tv9hindi.com



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