विद्यार्थियों ने सीखा कचरे से उपयोगी खाद बनाने का हुनर
दसूहा,(राजदार टाइम्स): जे.सी डी.ए.वी कॉलेज के इको क्लब द्वारा पर्यावरण संरक्षण एवं कचरा प्रबंधन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से तैयार की गई वर्मी कम्पोस्ट (केंचुआ खाद) की सफलतापूर्वक कटाई की गई। इस गतिविधि के माध्यम से जैविक कचरे को पौष्टिक एवं उपयोगी जैविक खाद में परिवर्तित करने की प्रक्रिया के महत्व को उजागर किया गया। इस अवसर पर बी.एससी अंतिम वर्ष के आठ विद्यार्थियों ने 'वर्मी कम्पोस्ट के माध्यम से कचरा प्रबंधन' विषय पर अपना इंटर्नशिप कार्यक्रम भी सफलतापूर्वक पूरा किया। यह इंटर्नशिप डॉ.धर्मेंद्र शर्मा के मार्गदर्शन में संपन्न हुई। इसके दौरान विद्यार्थियों को जैविक कचरे के उचित प्रबंधन तथा उससे जैविक खाद तैयार करने का व्यावहारिक प्रशिक्षण एवं अनुभव प्राप्त हुआ। वर्मी कम्पोस्ट रासायनिक उर्वरकों का एक पर्यावरण अनुकूल विकल्प है, जो मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने के साथ-साथ टिकाऊ कृषि को भी प्रोत्साहित करता है। कॉलेज में इस खाद की सफलतापूर्वक तैयारी एवं कटाई पर्यावरण संरक्षण के प्रति संस्थान की प्रतिबद्धता तथा विद्यार्थियों को व्यावहारिक शिक्षा प्रदान करने के प्रयासों का प्रमाण है। इको क्लब की ऐसी गतिविधियां 'कचरे से संपदा' के सिद्धांत को प्रोत्साहित करते हुए विद्यार्थियों एवं आम लोगों को स्वच्छ, हरित और स्वस्थ पर्यावरण के निर्माण के लिए प्रेरित करती हैं।

तैयार की गई वर्मी कम्पोस्ट कॉलेज के शिक्षकों एवं विद्यार्थियों के लिए खरीद हेतु उपलब्ध करवाई गई। इसके साथ ही यह भी घोषणा की गई कि इच्छुक आम नागरिकों के लिए भी यह जैविक खाद बिक्री हेतु उपलब्ध रहेगी, ताकि अधिक से अधिक लोग जैविक खेती और पर्यावरण हितैषी गतिविधियों को अपनाने के लिए प्रेरित हों। कॉलेज के प्राचार्य डॉ.भानु गुप्ता ने इको क्लब के सदस्यों एवं विद्यार्थियों के प्रयासों की सराहना करते हुए उन्हें पर्यावरण संरक्षण के लिए निरंतर कार्य करने हेतु प्रोत्साहित किया। उन्होंने स्वयं भी वर्मी कम्पोस्ट का एक बैग खरीदकर जैविक खाद के उपयोग को बढ़ावा देने का प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया। इस समय पर प्रो.राकेश कुमार महाजन, डॉ.अमित शर्मा, डॉ.हरजीत सिंह, डॉ.नरगिस, प्रो.नरिंदरजीत सिंह, डॉ.सुमन लाल, प्रो.प्रियंका, प्रो.हरजीत कौर, प्रो.शैफाली, प्रो.मनप्रीत कौर तथा कॉलेज के विद्यार्थी उपस्थित रहे। यह कार्यक्रम डी.ए.वी कॉलेज जालंधर के पर्यावरण शिक्षा कार्यक्रम के सक्षम नेतृत्व एवं मार्गदर्शन में आयोजित किया गया। इसे राज्य नोडल एजेंसी, पंजाब राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद तथा भारत सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय का सहयोग प्राप्त हुआ।



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