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शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2026
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संयुक्त राष्ट्र में भारत-पाकिस्तान फिर आमने-सामने, PoK पर भारत ने किया कड़ा प्रहार

संयुक्त राष्ट्र में भारत ने पाकिस्तान को PoK खाली करने की मांग और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर सवाल उठाए।

संयुक्त राष्ट्र में भारत-पाकिस्तान फिर आमने-सामने, PoK पर भारत ने किया कड़ा प्रहार

संयुक्त राष्ट्र में भारत और पाकिस्तान के बीच कश्मीर, अल्पसंख्यकों और जलवायु न्याय को लेकर फिर से तीखी बहस हुई। भारत ने पाकिस्तान पर अंतरराष्ट्रीय मंच का गलत इस्तेमाल करने का आरोप लगाया और PoK खाली करने की मांग दोहराई।

संयुक्त राष्ट्र में भारत ने पाकिस्तान को जवाब दिया

संयुक्त राष्ट्र महासभा की तीसरी समिति में भारत के स्थायी मिशन के फर्स्ट सेक्रेटरी राघू पुरी ने पाकिस्तान के बयान पर कड़ा जवाब दिया। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न और अटूट हिस्सा है। उन्होंने पाकिस्तान से अपने अवैध कब्जे वाले क्षेत्र खाली करने की मांग की।

राघू पुरी ने पाकिस्तान पर संयुक्त राष्ट्र के मंच का प्रोपेगैंडा फैलाने के लिए इस्तेमाल करने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को अपने देश के नागरिकों खासकर अल्पसंख्यक हिंदुओं के अधिकारों और भलाई पर ध्यान देना चाहिए।

पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की स्थिति पर सवाल

भारत की फर्स्ट सेक्रेटरी भाविका मंगलानंदन ने धर्म या विश्वास की स्वतंत्रता पर विशेष प्रतिवेदक के साथ चर्चा के दौरान एक रिपोर्ट के दृष्टिकोण पर सवाल उठाए। उन्होंने बताया कि कोविड-19 महामारी के दौरान धार्मिक भेदभाव से जुड़ी रिपोर्ट में विकासशील देशों पर ज़्यादा ध्यान दिया गया, जबकि विकसित देशों की घटनाओं को कम देखा गया।

राघू पुरी ने कहा कि अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा करना हर देश की संप्रभु जिम्मेदारी है। उन्होंने भारत की सांस्कृतिक विविधता और धार्मिक व भाषाई अल्पसंख्यकों को संविधान से मिले संरक्षण का जिक्र किया।

जलवायु न्याय और न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर भारत का पक्ष

संयुक्त राष्ट्र में भारत ने जलवायु परिवर्तन के खिलाफ अपनी प्रतिबद्धता भी जताई। उप सचिव बरखा ताम्रकार ने कहा कि जलवायु संकट विकास, आजीविका और मानवाधिकारों पर गंभीर प्रभाव डालता है।

उन्होंने जलवायु न्याय, समानता और सतत विकास के प्रति भारत की प्रतिबद्धता का उल्लेख किया। साथ ही, संविधान, पर्यावरण कानूनों, राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) और स्वतंत्र न्यायपालिका की भूमिका पर ज़ोर दिया। भारत ने बताया कि न्यायिक प्रशिक्षण और संस्थागत व्यवस्थाओं से न्यायपालिका की निष्पक्षता और स्वतंत्रता को मजबूत किया जा रहा है।

इस तरह संयुक्त राष्ट्र में भारत ने पाकिस्तान से जुड़े मुद्दों के साथ-साथ पर्यावरण और न्यायिक व्यवस्था पर भी अपनी स्पष्ट स्थिति प्रस्तुत की।

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