Rajdaar Times
शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2026
विज्ञापन
Rajdaar Times — यहाँ विज्ञापन दें
Rajdaar Times — यहाँ विज्ञापन दें

विश्व स्ट्रोक दिवस: स्ट्रोक के लक्षण और समय पर इलाज का महत्व

विश्व स्ट्रोक दिवस पर स्ट्रोक के लक्षण, इलाज और बचाव के उपायों के बारे में जानकारी दी गई है।

विश्व स्ट्रोक दिवस: स्ट्रोक के लक्षण और समय पर इलाज का महत्व

हर साल 29 अक्टूबर को विश्व स्ट्रोक दिवस मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य लोगों को स्ट्रोक के लक्षणों और समय पर इलाज की जरूरत के बारे में जागरूक करना है। स्ट्रोक एक गंभीर मेडिकल इमरजेंसी है जिसमें दिमाग तक खून और ऑक्सीजन पहुंचाने वाली रक्त वाहिकाओं में रुकावट या फटने से दिमाग के सेल्स तेजी से मरने लगते हैं।

स्ट्रोक क्या है और इसके लक्षण कैसे पहचानें?

डॉ. विपुल गुप्ता, डायरेक्टर न्यूरोइंटरवेंशनल सर्जरी, सर एच. एन. रिलायंस फाउंडेशन हॉस्पिटल, मुंबई के अनुसार, स्ट्रोक में देरी से इलाज मिलने पर मरीज को स्थायी लकवा, बोलने-समझने में दिक्कत, चलने में परेशानी और यहां तक कि मौत का खतरा हो सकता है।

स्ट्रोक के शुरुआती लक्षण अक्सर थकान या सामान्य कमजोरी समझकर नजरअंदाज कर दिए जाते हैं। स्ट्रोक को पहचानने के लिए B.E. F.A.S.T. तरीका अपनाया जाता है:

  • B (Balance): अचानक संतुलन बिगड़ना या चलने में दिक्कत
  • E (Eyes): नजर धुंधली होना या दो चीजें दिखाई देना
  • F (Face): चेहरे का एक तरफ झुकना या असमान मुस्कुराहट
  • A (Arms): एक हाथ या पैर में कमजोरी या सुन्नपन
  • S (Speech): बोलने में कठिनाई या शब्दों का सही न निकलना
  • T (Time): तुरंत मेडिकल सहायता लेना जरूरी

कभी-कभी ये लक्षण कुछ मिनटों में ठीक हो जाते हैं, लेकिन यह ट्रांजिएंट इस्केमिक अटैक (TIA) हो सकता है, जो बड़े स्ट्रोक का संकेत होता है। ऐसे में भी तुरंत जांच आवश्यक है।

स्ट्रोक के लक्षण दिखने पर क्या करें?

लक्षण दिखते ही तुरंत एंबुलेंस या आपातकालीन चिकित्सा सेवा लें और ऐसे अस्पताल पहुंचाएं जहां स्ट्रोक का इलाज संभव हो। मरीज को खुद ठीक होने का इंतजार न करें और न ही बिना डॉक्टर की सलाह के कोई दवा या खाना-पीना दें। क्योंकि निगलने की क्षमता प्रभावित हो सकती है और गलत दवा गंभीर समस्या बढ़ा सकती है।

उन्नत इलाज के विकल्प क्या हैं?

चिकित्सा विज्ञान में प्रगति के कारण अब स्ट्रोक के कई प्रभावी इलाज उपलब्ध हैं। इस्केमिक स्ट्रोक में एल्टेप्लेस और टेनेक्टेप्लेस जैसी क्लॉट घोलने वाली दवाएं लक्षण शुरू होने के साढ़े चार घंटे के भीतर दी जाती हैं। इसके लिए मस्तिष्क की इमेजिंग और मरीज की स्थिति का आकलन जरूरी होता है।

अगर मस्तिष्क की बड़ी रक्त वाहिका में थक्का फंसा हो तो मैकेनिकल थ्रोम्बेक्टॉमी की जाती है, जिसमें कैथेटर से थक्का निकालकर रक्त प्रवाह बेहतर किया जाता है।

ब्रेन इमेजिंग जांचों जैसे सीटी एंजियोग्राफी, सीटी परफ्यूजन और एमआरआई से रक्त वाहिका की स्थिति और मस्तिष्क को हुए नुकसान का आकलन होता है, जिससे डॉक्टर सही उपचार तय करते हैं।

रक्तस्राव वाले स्ट्रोक में क्या सावधानियां जरूरी हैं?

सभी स्ट्रोक खून के थक्के से नहीं होते। मस्तिष्क की रक्त वाहिका फटने या ब्रेन एन्यूरिज्म टूटने से भी स्ट्रोक हो सकता है। ऐसे मामलों में रक्तचाप नियंत्रण, दवाओं के प्रभाव उलटना और जरूरत पड़ने पर न्यूरोसर्जिकल या एंडोवैस्कुलर उपचार जरूरी होता है।

स्ट्रोक से बचाव के उपाय क्या हैं?

हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखें। धूम्रपान और तंबाकू से बचें, नियमित व्यायाम करें, संतुलित आहार लें और हृदय रोगों का समय पर इलाज कराएं। नियमित स्वास्थ्य जांच से जोखिम कारकों की पहचान संभव है।

स्ट्रोक के बारे में जानने योग्य मुख्य बातें

  • स्ट्रोक में समय पर इलाज से जान बच सकती है।
  • B.E. F.A.S.T. तरीका लक्षण पहचानने में मदद करता है।
  • दवाएं और मैकेनिकल थ्रोम्बेक्टॉमी से उपचार संभव है।
  • रक्तस्राव वाले स्ट्रोक में अलग तरीके से इलाज करना पड़ता है।
  • स्वस्थ जीवनशैली स्ट्रोक का खतरा कम करती है।

स्रोत: tv9hindi.com

यह खबर शेयर करें
संपादकीय टीम
संपादकीय टीम · Admin

राजदार टाइम्स की संपादकीय टीम।

संपादकीय टीम की और खबरें →

टिप्पणियाँ

इस खबर पर सबसे पहले अपनी टिप्पणी करें।