कनाडा के तेल-समृद्ध प्रांत अल्बर्टा के मतदाताओं ने देश से अलग होने की प्रक्रिया शुरू करने के प्रस्ताव को साफ तौर पर खारिज कर दिया है। 10 लाख से अधिक मतों की गिनती के बाद करीब 76 प्रतिशत लोगों ने कनाडा के साथ बने रहने का समर्थन किया, जबकि लगभग 23 प्रतिशत ने ऐसी प्रक्रिया के पक्ष में वोट दिया, जो आगे चलकर अलगाव की राह खोल सकती थी।
यह मतदान सीधे तौर पर आजादी पर जनमत संग्रह नहीं था, लेकिन प्रस्ताव पास होने पर प्रांत भविष्य में अलग होने के मुद्दे पर बाध्यकारी मतदान की ओर बढ़ सकता था। यह फैसला ऐसे समय आया है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से व्यापार युद्ध और क्षेत्रीय विस्तार से जुड़ी धमकियां लगातार दी जा रही हैं।
कार्नी बोले- अल्बर्टा ने कनाडा को चुना
नतीजों के बाद प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने एक्स पर लिखा कि 19 अक्तूबर को अल्बर्टा के लोगों ने स्पष्ट फैसला सुनाया है। उन्होंने एकता को, साथ मिलकर निर्माण करने और एक-दूसरे का ख्याल रखने को चुना है और सबसे बढ़कर कनाडा को चुना है। अलगाव के खिलाफ 'फॉरएवर कैनेडियन' अभियान का नेतृत्व करने वाले पूर्व डिप्टी प्रीमियर थॉमस लुकासजुक ने समर्थकों से कहा कि कनाडा एक छोर से दूसरे छोर तक एकजुट और मजबूत देश है।
प्रांत में 10 सवालों वाला जनमत संग्रह कराया गया था। दसवें सवाल में पूछा गया था कि क्या अल्बर्टा कनाडा का प्रांत बना रहे या प्रांतीय सरकार संविधान के तहत वह कानूनी प्रक्रिया शुरू करे, जिससे अलग होने पर बाध्यकारी प्रांतीय जनमत संग्रह कराया जा सके। बाकी नौ प्रश्न आव्रजन और संवैधानिक बदलावों पर केंद्रित थे, जिनमें आव्रजन पर अधिक प्रांतीय नियंत्रण का सवाल भी शामिल था।
सीबीसी के अनुसार सभी 10 सवाल गैर-बाध्यकारी हैं, यानी प्रांतीय सरकार कानूनी तौर पर इन नतीजों पर अमल के लिए बाध्य नहीं है। नतीजों की वैधता के लिए न्यूनतम मतदान की कोई शर्त भी नहीं रखी गई थी।
अल्बर्टा में दुनिया का चौथा सबसे बड़ा तेल भंडार है। 'काउबॉय कंट्री' कहे जाने वाले इस रूढ़िवादी गढ़ की राजनीतिक संस्कृति कई मायनों में अमेरिकी पश्चिम के करीब मानी जाती है। ओटावा की संघीय सरकार को लेकर यहां नाराजगी जरूर रही है, लेकिन वह परंपरागत रूप से कभी आजादी के व्यापक समर्थन में नहीं बदली।



टिप्पणियाँ
इस खबर पर सबसे पहले अपनी टिप्पणी करें।