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शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2026
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सिमली बेस अस्पताल के लिए दस दिन पैदल चलकर देहरादून पहुंचे ग्रामीण, बहिष्कार की चेतावनी

2012 में घोषित अस्पताल का भवन और मशीनें मौजूद, पर विशेषज्ञ डॉक्टर नहीं; ग्रामीणों ने शासनादेश जारी न होने पर सीएम आवास घेराव की बात कही।

सिमली बेस अस्पताल के लिए दस दिन पैदल चलकर देहरादून पहुंचे ग्रामीण, बहिष्कार की चेतावनी
प्रतीकात्मक तस्वीर: उत्तराखंड के पहाड़ी गांव के सीढ़ीदार खेत और पैदल रास्ता (फोटो: Rohit Gosain, विकिमीडिया कॉमन्स, CC BY-SA 4.0)

चमोली जिले के कर्णप्रयाग क्षेत्र के सिमली में बेस अस्पताल शुरू करने की मांग को लेकर ग्रामीणों का सब्र अब जवाब दे गया है। 11 अक्टूबर को सिमली के चंडिका मंदिर में माथा टेककर निकले पचास से ज्यादा गांवों के लोग दस दिन तक पैदल चलकर 20 अक्टूबर को देहरादून के गांधी पार्क पहुंचे। प्रशासन ने आंदोलनकारियों को गांधी पार्क में ही रोक लिया।

सिमली में बेस अस्पताल की घोषणा वर्ष 2012 में तत्कालीन मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा के कार्यकाल में हुई थी। बाद में इसे महिला बेस चिकित्सालय बनाने की बात उठी और 2019 में तत्कालीन मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के समय दस करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए। भवन बनकर तैयार हुआ और 2022 में छह डॉक्टरों, फार्मासिस्टों और नर्सिंग अधिकारियों की नियुक्ति के निर्देश भी जारी हुए। ग्रामीणों के अनुसार मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी 2024 में घोषणा की थी, लेकिन वह अब तक पूरी नहीं हुई।

मशीनें हैं, चलाने वाले नहीं

ग्रामीणों का कहना है कि अस्पताल में एक्स-रे और अल्ट्रासाउंड की मशीनें तो हैं, पर उन्हें चलाने के लिए विशेषज्ञ डॉक्टर और तकनीशियन उपलब्ध नहीं हैं। जून 2025 में साठ से ज्यादा ग्राम पंचायतों के लोग, महिला मंगल दल और जनप्रतिनिधि सिमली की महापंचायत में जुटे थे। तब विधायक अनिल नौटियाल ने 15 अगस्त तक शासनादेश जारी होने का भरोसा दिया था। सितंबर में केवल बोर्ड बदलकर महिला बेस अस्पताल की जगह बेस अस्पताल लिख दिया गया, लेकिन औपचारिक शासनादेश अब तक जारी नहीं हुआ।

पदयात्रा में शामिल डूंगा की एक महिला ने बताया कि गर्भावस्था के सातवें महीने में तबीयत बिगड़ने पर उन्हें देहरादून रेफर करना पड़ा और वे मुश्किल से बचीं। एक अन्य ग्रामीण ने बताया कि उनके एक साथी को दिल का दौरा पड़ने पर अस्पताल लाया गया, लेकिन हृदय विशेषज्ञ न होने के कारण श्रीनगर रेफर किया गया और रास्ते में उनकी मौत हो गई। 75 वर्षीय एक बुजुर्ग ने कहा कि राज्य बनने के बाद भी हालात जस के तस हैं।

आंदोलनकारियों ने साफ कहा है कि अगर जल्द ही पूर्ण बेस अस्पताल का शासनादेश जारी नहीं हुआ तो वे मुख्यमंत्री आवास का घेराव करेंगे और 2027 के विधानसभा चुनाव का पूरी तरह बहिष्कार करेंगे। उन्होंने गैरसैंण में होने वाले विधानसभा सत्र के दौरान भी घेराव की चेतावनी दी है।

पहाड़ के दूरदराज इलाकों में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी लंबे समय से बड़ा मुद्दा रही है। सिमली का यह आंदोलन बताता है कि घोषणाओं और जमीनी हकीकत के बीच की दूरी ग्रामीणों के लिए किस कदर भारी पड़ रही है।

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