हरिद्वार में हरकी पैड़ी पर गंगा स्नान के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को अगले 18 दिन परेशानी का सामना करना पड़ेगा। सालाना मरम्मत कार्यों के लिए ऊपरी गंगनहर को मंगलवार की मध्यरात्रि से बंद कर दिया गया है। इसके चलते हरकी पैड़ी पर गंगा जल का संकट खड़ा हो गया है। अब सात नवंबर की मध्यरात्रि को गंगनहर दोबारा चालू की जाएगी और तब तक हरकी पैड़ी पर स्नान के लिए सामान्य रूप से पानी नहीं पहुंचेगा।
हरकी पैड़ी पर मां गंगा में स्नान के लिए देश-विदेश से श्रद्धालु पहुंचते हैं। यहां की धार्मिक गतिविधियों से स्थानीय व्यापारियों का कारोबार भी चलता है। गंगनहर बंद होने से श्रद्धालुओं की संख्या घटने की आशंका है, जिसका सीधा असर व्यापारियों की कमाई पर पड़ेगा।
त्योहारी सीजन में बंदी पर व्यापारियों की नाराजगी
व्यापारी लंबे समय से त्योहारी सीजन में गंगनहर बंद करने का विरोध करते आ रहे हैं। उनका कहना है कि दिवाली और अन्य पर्वों के दौरान ही सबसे ज्यादा श्रद्धालु आते हैं और इसी समय पानी रोक देने से उनका कारोबार ठप हो जाता है। हालांकि व्यापारियों की इस मांग पर अब तक कोई सुनवाई नहीं हुई है।
गंगनहर बंदी का असर केवल हरिद्वार तक सीमित नहीं रहेगा। उत्तराखंड से होकर उत्तर प्रदेश जाने वाली इस नहर से बड़ी संख्या में किसान सिंचाई करते हैं। नहर बंद रहने के दौरान उन्हें भी सिंचाई के लिए पानी नहीं मिलेगा। इसका असर दिल्ली-एनसीआर तक दिखने की बात कही जा रही है, जहां गंगनहर के पानी पर कई व्यवस्थाएं निर्भर हैं।
उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग के एसडीओ भारत भूषण ने बताया कि गंगनहर बंदी के दौरान भी हरकी पैड़ी पर गंगा स्नान के लिए पानी पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा, ताकि श्रद्धालुओं को स्नान में दिक्कत न हो।
हर साल होने वाली इस बंदी के दौरान नहर की सफाई और मरम्मत का काम किया जाता है, ताकि पूरे साल पानी की आपूर्ति सुचारू बनी रहे। लेकिन इसकी टाइमिंग को लेकर स्थानीय कारोबारियों और श्रद्धालुओं की शिकायतें हर बार सामने आती हैं। अब देखना होगा कि सिंचाई विभाग हरकी पैड़ी पर पानी की वैकल्पिक व्यवस्था किस हद तक कर पाता है।



टिप्पणियाँ
इस खबर पर सबसे पहले अपनी टिप्पणी करें।