देव आस्था, परंपरा और लोक संस्कृति के अनूठे संगम अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा उत्सव का बुधवार शाम भगवान रघुनाथ की रथयात्रा के साथ शुभारंभ होना है। उत्सव के लिए करीब 200 देवी-देवता ढालपुर मैदान पहुंच चुके हैं, जहां वे अस्थायी शिविरों में विराजमान हुए हैं। ढोल-नगाड़ों और पारंपरिक वाद्यों की गूंज के बीच पूरी कुल्लू घाटी उत्सव के रंग में रंगी है।
उत्सव की परंपरा निभाने के लिए माता हिडिंबा मंगलवार को मनाली के ढूंगरी स्थित अपने मंदिर से कुल्लू के लिए रवाना हुईं। मनाली से कुल्लू तक रास्ते में जगह-जगह माता की शोभायात्रा का भव्य स्वागत हुआ। श्रद्धालुओं ने साथ चल रहे देवलुओं के लिए जूस, हलवा और पानी की व्यवस्था की तथा देव भोज का आयोजन भी किया गया। देर शाम शोभायात्रा रामशीला स्थित हनुमान मंदिर पहुंची।
माता हिडिंबा के बिना अधूरा दशहरा
माता के गूर देवी चंद ने बताया कि कुल्लू दशहरा में माता हिडिंबा की विशेष भूमिका होती है और उनके आगमन के बिना उत्सव की परंपराएं अधूरी मानी जाती हैं। बुधवार सुबह भगवान रघुनाथ की ओर से माता को निमंत्रण स्वरूप छड़ी भेजी जाएगी। इसके बाद माता रघुनाथ मंदिर पहुंचेंगी और फिर भगवान रघुनाथ की रथयात्रा में शामिल होंगी।
उत्सव में देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों की सुरक्षा के लिए पुलिस ने व्यापक इंतजाम किए हैं। कुल 1265 जवान तैनात रहेंगे, जिनमें 1125 पुलिसकर्मी और 140 होमगार्ड शामिल हैं। ढालपुर सहित पूरे उत्सव क्षेत्र पर 155 सीसीटीवी कैमरों और ड्रोन से नजर रखी जाएगी। भीड़ प्रबंधन के लिए क्षेत्र को छह सेक्टरों में बांटा गया है और यातायात संभालने के लिए 430 जवान लगाए गए हैं। बजौरा पुल और हाथीथान में चेक पोस्ट भी बनाई गई हैं।
वाहनों की भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने 18 स्थानों पर पार्किंग की व्यवस्था की है। निचले ढालपुर बस स्टैंड के सामने खोरी रोपा में सबसे बड़ी पार्किंग बनाई गई है, जहां 900 वाहन खड़े हो सकेंगे। रथयात्रा और यातायात को सुचारु रखने के लिए 11 मार्गों और क्षेत्रों में नो-पार्किंग लागू की गई है।
कुल्लू दशहरा अपनी देव परंपरा के कारण देश के बाकी दशहरा उत्सवों से अलग पहचान रखता है। यहां रावण दहन के बजाय घाटी भर के देवी-देवताओं का यह मिलन ही उत्सव का केंद्र होता है, जिसे देखने बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं।



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