Rajdaar Times
शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2026
विज्ञापन
Rajdaar Times — यहाँ विज्ञापन दें
Rajdaar Times — यहाँ विज्ञापन दें

सूरजगढ़ चुनाव: कथित फर्जी हाईकोर्ट आदेश विवाद में विधायक पुत्र का नामांकन रद्द

झुंझुनूं में विधायक श्रवण कुमार के बेटे जयप्रकाश का नामांकन सत्यापित आदेश न मिलने पर 17 अक्टूबर को निरस्त किया गया।

सूरजगढ़ चुनाव: कथित फर्जी हाईकोर्ट आदेश विवाद में विधायक पुत्र का नामांकन रद्द
प्रतीकात्मक तस्वीर: रोशनी से सजा झुंझुनूं जिले के सूरजगढ़ का किला (फोटो: Bright-210, विकिमीडिया कॉमन्स, CC BY-SA 4.0)

झुंझुनूं जिले में पंचायत चुनाव के बीच सूरजगढ़ पंचायत समिति का एक मामला सुर्खियों में है। सूरजगढ़ विधायक श्रवण कुमार के बेटे जयप्रकाश का नामांकन कथित फर्जी हाईकोर्ट आदेश के इस्तेमाल के आरोपों के चलते विवाद में घिर गया और जिला निर्वाचन अधिकारी ने 17 अक्टूबर को इसे निरस्त कर दिया। जयप्रकाश ने वार्ड संख्या 7 से चुनाव लड़ने के लिए नामांकन दाखिल किया था।

जानकारी के अनुसार जयप्रकाश का नाम सूरजगढ़ नगर पालिका की मतदाता सूची में दर्ज है। पंचायत समिति चुनाव लड़ने के लिए उन्होंने जीणी ग्राम पंचायत के वार्ड 5 की सूची में नाम जुड़वाने का आवेदन किया था, लेकिन प्रक्रिया समय पर पूरी नहीं हो सकी। इसके बाद 15 अक्टूबर को उन्होंने राजस्थान हाईकोर्ट में याचिका लगाई। 16 अक्टूबर को सुनवाई में अदालत ने मामला 27 अक्टूबर को अगली सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का आदेश दिया।

व्हाट्सएप पर आया आदेश बना सवाल

नामांकन की अंतिम तिथि 16 अक्टूबर को जयप्रकाश एसडीएम और रिटर्निंग अधिकारी संदीप चौधरी के कार्यालय पहुंचे थे। एसडीएम के अनुसार हाईकोर्ट का एक कथित आदेश उनके आधिकारिक व्हाट्सएप नंबर पर मंगवाया गया, जिसका प्रिंट लेकर आवेदन स्वीकार कर लिया गया। बाद में जांच में पता चला कि असली अदालती आदेश में ऐसा कोई निर्देश नहीं था, उसमें केवल 27 अक्टूबर की सुनवाई का उल्लेख था।

जिला निर्वाचन अधिकारी डॉ. अरुण गर्ग ने बताया कि एसडीएम ने अदालत के आदेश की मूल या सत्यापित प्रति के बिना मामला भेजा था। मतदाता सूची का पोर्टल फ्रीज हो चुका था, इसलिए उन्होंने राज्य निर्वाचन आयोग से मार्गदर्शन मांगा। आयोग ने सत्यापित प्रति मांगी, जो तय समय तक नहीं दी गई और इसी आधार पर नामांकन रद्द हुआ। उन्होंने कहा कि दस्तावेजों में कूटरचना साबित होने पर नियमों के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी।

दूसरी ओर जयप्रकाश का कहना है कि उन्होंने कानूनी तरीके से आवेदन किया और हाईकोर्ट में याचिका भी लगाई, पर समय निकल जाने से नाम नहीं जुड़ सका। उन्होंने साफ कहा कि नामांकन के साथ उन्होंने कोई हाईकोर्ट आदेश नहीं लगाया और यह आदेश एसडीएम के व्हाट्सएप पर किसने भेजा, इसकी उन्हें जानकारी नहीं है।

फिलहाल प्रशासन यह पता लगाने में जुटा है कि कथित फर्जी आदेश किसने तैयार किया। यह प्रकरण चुनावी प्रक्रिया में दस्तावेजों के सत्यापन की अहमियत पर भी सवाल खड़े करता है।

यह खबर शेयर करें
संपादकीय टीम
संपादकीय टीम · Admin

राजदार टाइम्स की संपादकीय टीम।

संपादकीय टीम की और खबरें →

टिप्पणियाँ

इस खबर पर सबसे पहले अपनी टिप्पणी करें।