इजराइल के राष्ट्रपति इसाक हर्जोग ने 27 अक्टूबर के त्रिशंकु चुनावों के बाद विपक्षी नेता पूर्व सैन्य प्रमुख आइसेनकोट को सरकार बनाने का पहला मौका दिया है। आइसेनकोट के पास छह हफ्ते का समय है ताकि वे नए गठबंधन के जरिए देश में सरकार बना सकें। यह फैसला इजराइल के राजनीतिक माहौल में बड़ा बदलाव ला सकता है, क्योंकि प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू सत्ता से हटाए जाने के करीब हैं।
आइसेनकोट को मिली सरकार गठन की जिम्मेदारी
चुनावों में किसी पार्टी को स्पष्ट जीत नहीं मिली है। राष्ट्रपति हर्जोग ने विपक्षी दलों के प्रतिनिधियों से सलाह लेने के बाद आइसेनकोट को सरकार बनाने का न्योता दिया। लेकिन संसद में बहुमत जुटाना चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। नेतन्याहू ने अपनी पार्टी लिकुड के साथ बहुमत खो दिया है, और आइसेनकोट के गठबंधन को भी पूर्ण समर्थन नहीं मिल पाया।
साथ ही, अरब पार्टियों ने ऐतिहासिक बढ़त हासिल की है, जो अब ‘किंगमेकर’ की भूमिका निभा सकती हैं। हालांकि, राजनीतिक रूप से यह स्थिति काफी जटिल है क्योंकि इजराइल में अरब पार्टियों का गठबंधन सरकार में शामिल होना अब तक केवल एक बार हुआ है।
क्या आइसेनकोट राष्ट्रीय एकता सरकार बना पाएंगे?
आइसेनकोट ने कुछ शर्तों के साथ अरब-नेतृत्व वाले दलों के साथ काम करने की इच्छा जताई है, जिसमें हमास को आतंकवादी समूह मानना और उसे खत्म करने की बात शामिल है। वहीं, नेतन्याहू ने अरब दलों के साथ गठबंधन को रोकने के लिए अभियान चलाया है और उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बताया है।
नेतन्याहू ने राष्ट्रीय एकता सरकार बनाने की अपील भी की है, लेकिन साथ ही उन्होंने चेतावनी दी है कि आतंकवाद का समर्थन करने वाले दलों के साथ जल्दबाजी में सरकार का शपथ ग्रहण नहीं होना चाहिए।
गठबंधन बनाने में क्या चुनौतियां हैं?
आइसेनकोट और नेतन्याहू के बीच कई मुद्दों पर मतभेद हैं, जैसे कि नेतन्याहू द्वारा धार्मिक दलों का समर्थन, जो अल्ट्रा-ऑर्थोडॉक्स यहूदी पुरुषों को सैन्य सेवा से छूट देना चाहते हैं। इसके अलावा, 7 अक्टूबर के हमलों की विफलताओं की जांच को लेकर भी नेतन्याहू विरोधी हैं।
आइसेनकोट अल्पसंख्यक सरकार बनाने की कोशिश कर सकते हैं, जिसे अरब दल बाहरी समर्थन दे सकते हैं, लेकिन उनके गठबंधन के सदस्य इस प्रस्ताव का विरोध कर रहे हैं।
आइसेनकोट की पार्टी की प्रतिक्रिया
आइसेनकोट की पार्टी 'याशार' ने नेतन्याहू की आलोचना करते हुए उनके धार्मिक-राष्ट्रवादी दक्षिणपंथी गठबंधन से अलग होने की अपील की है। पार्टी ने कहा है कि वे केवल उन्हीं दलों और सांसदों को साथ लेंगे जो उनके सिद्धांतों का समर्थन करते हैं।
स्रोत: tv9hindi.com



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