जापानी मीडिया की रिपोर्टों में दावा किया गया है कि अगर जापान के 'मोगामी-क्लास' फ्रिगेट में भारत की ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल को जोड़ा जाए, तो यह एक बेहद घातक संयोजन बन सकता है। रिपोर्टों के अनुसार जापान ने भारत को इस फ्रिगेट के डिजाइन और उसे देश में ही बनाने के अधिकार देने का प्रस्ताव दिया हुआ है। हालांकि यह भी कहा गया है कि ब्रह्मोस को इस युद्धपोत में फिट करना आसान काम नहीं होगा।
रिपोर्ट के हवाले से बताया गया है कि भारतीय रक्षा योजनाकार स्वाभाविक रूप से चाहेंगे कि इस जहाज पर ब्रह्मोस तैनात हो। लेकिन ब्रह्मोस मिसाइल आकार में जापान की 'टाइप 17' एंटी-शिप मिसाइल से काफी बड़ी है, जो फिलहाल इन जहाजों पर लगी है। इसलिए जहाज के डिजाइन, लड़ाकू प्रणाली और मिसाइल लॉन्च व्यवस्था में कई बड़े बदलाव करने पड़ सकते हैं।
कैसा है मोगामी-क्लास फ्रिगेट
मोगामी-क्लास फ्रिगेट को एक अलग हथियार और सेंसर ढांचे के आधार पर तैयार किया गया है। इन पर 'टाइप 17' एंटी-शिप मिसाइलों के अलावा 127 मिमी की नेवल गन, 'सी-रैम' क्लोज-इन वेपन सिस्टम, टॉरपीडो और वर्टिकल लॉन्च सिस्टम मौजूद हैं। इन जहाजों में ऑटोमेशन पर खास जोर है, जिसके चलते इन्हें करीब 90 कर्मियों के दल के साथ संचालित किया जा सकता है।
रिपोर्ट के अनुसार ब्रह्मोस को जोड़ने के लिए इंजीनियरों को केवल मिसाइल के आकार पर ही नहीं, बल्कि लॉन्च व्यवस्था, ढांचे पर पड़ने वाले भार, बिजली और डेटा इंटरफेस, कॉम्बैट मैनेजमेंट सॉफ्टवेयर और फायर-कंट्रोल ढांचे जैसे कई पहलुओं की बारीकी से जांच करनी होगी। कितने बदलाव जरूरी होंगे, यह इस पर निर्भर करेगा कि ब्रह्मोस का कौन-सा संस्करण चुना जाता है और भारत मौजूदा लॉन्च प्रणाली अपनाता है या कोई नई व्यवस्था तैयार करता है।
रिपोर्ट में इस बात पर भी चर्चा की गई है कि भारत जापान के डिजाइन किए गए इस फ्रिगेट को अपने घरेलू शिपयार्ड में बनवा सकता है। हालांकि यह साफ किया गया है कि यह प्रस्ताव अभी भारत का कोई पक्का खरीद कार्यक्रम नहीं है।
उपलब्ध जानकारी के मुताबिक इस संबंध में न तो कोई औपचारिक 'रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल' जारी हुआ है, न कोई अनुबंध तय हुआ है और न ही किसी भी सरकार ने ब्रह्मोस को इसमें शामिल करने की मंजूरी दी है।



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