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शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2026
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पहली बिम्सटेक गृह मंत्री बैठक में दिल्ली घोषणा-पत्र मंजूर, सुरक्षा सहयोग पर जोर

अमित शाह की अध्यक्षता में हुई बैठक में सात सदस्य देशों ने आतंकवाद, नशा तस्करी और साइबर अपराध के खिलाफ मिलकर काम करने का संकल्प लिया।

पहली बिम्सटेक गृह मंत्री बैठक में दिल्ली घोषणा-पत्र मंजूर, सुरक्षा सहयोग पर जोर
बिम्सटेक गृह मंत्री बैठक के दौरान अमित शाह और श्रीलंका के मंत्री अनंदा विजेपाला

बंगाल की खाड़ी क्षेत्र की साझा सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए नई दिल्ली में बिम्सटेक देशों के गृह मंत्रियों की पहली बैठक आयोजित हुई। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में बांग्लादेश, भूटान, भारत, म्यांमार, नेपाल, श्रीलंका और थाईलैंड के प्रतिनिधि शामिल हुए। बैठक के अंत में सदस्य देशों ने 'दिल्ली घोषणा-पत्र' को स्वीकार किया, जिसका मकसद कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच तालमेल को मजबूत करना है।

घोषणा-पत्र में किन मुद्दों पर सहमति

घोषणा-पत्र में बिम्सटेक देशों ने एक जुड़े हुए, सुरक्षित, लचीले और समृद्ध क्षेत्र के निर्माण की प्रतिबद्धता दोहराई। इसमें माना गया कि बंगाल की खाड़ी क्षेत्र के सामने मौजूद खतरे किसी एक देश तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उनका असर सीमाओं के पार तक जाता है। आतंकवाद, उसे बढ़ावा देने वाले हिंसक उग्रवाद, मादक पदार्थों और मानव तस्करी, मनी लॉन्ड्रिंग, आतंक के वित्तपोषण, साइबर अपराध और अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध के खिलाफ सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी।

दस्तावेज में बिम्सटेक के मौजूदा कानूनी समझौतों को प्रभावी तरीके से लागू करने और प्रस्तावित सम्मेलनों को जल्द अंतिम रूप देने की जरूरत भी रेखांकित की गई। आपराधिक मामलों में पारस्परिक कानूनी सहायता, प्रत्यर्पण और सजायाफ्ता कैदियों के स्थानांतरण पर सहयोग बढ़ाने की बात कही गई। सूचनाओं के आदान-प्रदान, विशेष प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण को भी सहयोग के अहम क्षेत्रों में शामिल किया गया।

श्रीलंका की ओर से सार्वजनिक सुरक्षा एवं संसदीय मामलों के मंत्री अनंदा विजेपाला ने भाग लिया। उन्होंने कहा कि सुरक्षा ही टिकाऊ आर्थिक और सामाजिक विकास की नींव है और लोगों को बिना डर के यात्रा व कारोबार करने का माहौल मिलना चाहिए। उन्होंने नशीले पदार्थों की तस्करी को गंभीर सीमा पार चुनौती बताते हुए कहा कि इसके तार संगठित आपराधिक नेटवर्क, अंतरराष्ट्रीय परिवहन मार्गों, वित्तीय लेन-देन और आधुनिक संचार तकनीकों से जुड़े हैं, इसलिए अकेले राष्ट्रीय स्तर की कार्रवाई काफी नहीं है। उन्होंने श्रीलंका के राष्ट्रीय नशा रोकथाम कार्यक्रम 'रतमा एकता' का भी उल्लेख किया।

उल्लेखनीय है कि इस मंत्रीस्तरीय बैठक से पहले 12 अक्तूबर को सदस्य देशों के गृह मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारियों की पहली बैठक हुई थी। उसमें मानव तस्करी, मनी लॉन्ड्रिंग, आतंक के वित्तपोषण पर रोक, नशा नियंत्रण और आपदा प्रबंधन से जुड़ी पहलों की समीक्षा की गई थी।

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