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शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2026
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भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौता लागू, भारतीय निर्यात को 100% शुल्क-मुक्त पहुंच

समझौते से अगले 15 साल में 20 अरब डॉलर निवेश की उम्मीद; डेयरी, प्याज, चीनी समेत कई संवेदनशील उत्पाद दायरे से बाहर रखे गए।

भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौता लागू, भारतीय निर्यात को 100% शुल्क-मुक्त पहुंच
भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौता

भारत और न्यूजीलैंड के बीच लंबे समय से प्रतीक्षित मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) 20 अक्तूबर से लागू हो गया है। इसके तहत भारतीय निर्यातकों को न्यूजीलैंड के बाजार में 100 फीसदी शुल्क-मुक्त पहुंच मिलेगी, जिससे सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों, महिला उद्यमियों, किसानों और कारीगरों के लिए नए अवसर खुलेंगे। समझौते से अगले 15 वर्षों में भारत में 20 अरब डॉलर का निवेश आने की उम्मीद है।

दोनों देशों ने 2030 तक वस्तुओं और सेवाओं का द्विपक्षीय व्यापार दोगुना कर 7 अरब न्यूजीलैंड डॉलर यानी करीब 35,000 करोड़ रुपये तक ले जाने का लक्ष्य तय किया है। इसके लिए करीब 18 फीसदी की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर जरूरी होगी।

किन क्षेत्रों को फायदा

कपड़ा, परिधान, चमड़ा और फुटवियर जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों को 10 फीसदी तक के शुल्क खत्म होने का लाभ मिलेगा। इंजीनियरिंग सामान, दवाइयों, मशीनरी, रसायन और कृषि उत्पादों को भी बेहतर बाजार पहुंच की उम्मीद है। न्यूजीलैंड के व्यापार और निवेश मंत्री टॉड मैक्ले ने कहा कि पूरी तरह लागू होने के बाद भारत को होने वाले न्यूजीलैंड के मौजूदा निर्यात के 95 फीसदी हिस्से पर शुल्क खत्म या काफी कम हो जाएगा। शहद, सेब, कीवीफ्रूट, एल्बुमिन, वाइन, फार्मा उत्पाद, पॉलिमर और एल्युमीनियम जैसे न्यूजीलैंड के उत्पादों पर शुल्क घटाए गए हैं।

समझौते के तहत न्यूजीलैंड में पढ़ाई के लिए जाने वाले भारतीय युवाओं को गारंटीड वर्क वीजा मिलेगा। कार्गो के लिए 48 घंटे और जल्दी खराब होने वाले सामान तथा एक्सप्रेस खेप के लिए 24 घंटे के भीतर कस्टम क्लीयरेंस का प्रावधान है। डिजिटल प्रमाणन और रूल्स ऑफ ओरिजिन के स्व-प्रमाणन से अनुपालन लागत घटाने का लक्ष्य रखा गया है।

वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि भारतीय किसानों को फल, सब्जियों और मसालों के लिए बड़ा बाजार मिलेगा। घरेलू किसानों की सुरक्षा के लिए न्यूजीलैंड के सेब, कीवीफ्रूट और मनुका शहद पर टैरिफ-रेट कोटा और न्यूनतम आयात मूल्य जैसे उपाय रखे गए हैं। दोनों देश सटीक खेती जैसी तकनीकों पर एक कृषि उत्पादकता साझेदारी भी शुरू करेंगे।

भारत ने डेयरी उत्पाद, प्याज, चीनी, चना, मटर, मक्का, बादाम, विभिन्न वसा और तेल, रत्न-आभूषण, एल्युमीनियम, तांबा तथा हथियार-गोला बारूद को समझौते से बाहर रखा है। वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने कहा कि यह रिश्ता केवल निर्यात बढ़ाने तक सीमित नहीं, बल्कि मजबूत और टिकाऊ आर्थिक साझेदारी बनाने पर केंद्रित है।

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