स्टार फुटबॉलर क्रिस्टियानो रोनाल्डो के खिलाफ पुर्तगाल फुटबॉल महासंघ (एफपीएफ) ने अनुशासनात्मक कार्रवाई की है। महासंघ की अनुशासन परिषद ने 41 वर्षीय रोनाल्डो को 30 दिन के लिए निलंबित कर दिया है और उन पर 255 यूरो यानी करीब 286 डॉलर का जुर्माना भी लगाया है। यह सजा राष्ट्रीय टीम का कैंप बिना अनुमति छोड़ने के मामले में दी गई है।
यह पूरा विवाद पुर्तगाल के कोच जॉर्ज जीसस के साथ रोनाल्डो के कथित मतभेद से जुड़ा है। बताया गया है कि भूमिका को लेकर कोच से मतभेद होने पर रोनाल्डो डेनमार्क से होने वाले नेशंस लीग मैच से पहले ही राष्ट्रीय टीम का शिविर छोड़कर चले गए थे। इस पर एफपीएफ ने 9 अक्टूबर को उनके खिलाफ अनुशासनात्मक प्रक्रिया शुरू की थी।
नॉर्वे के खिलाफ बेंच पर बैठने से बढ़ा मामला
रोनाल्डो की शिकायत थी कि कोच अपनी ही बात से दो बार मुकर गए, जो उन्होंने टीम में उनकी जिम्मेदारी को लेकर कही थी। नॉर्वे के खिलाफ मुकाबले में जब रोनाल्डो एक मिनट के लिए भी नहीं खेले और पूरा मैच बेंच पर बैठकर देखा, तब यह मनमुटाव और बढ़ गया। इसके बाद उन्होंने कोपेनहेगन में टीम का बेस छोड़ दिया। जीसस ने रोनाल्डो के साथ किसी समझौते से इनकार किया था, हालांकि डेनमार्क पर जीत के बाद उन्होंने स्टार खिलाड़ी की वापसी की संभावना पूरी तरह खारिज नहीं की।
महासंघ की अनुशासन परिषद (गैर-पेशेवर वर्ग) के निर्णय के अनुसार रोनाल्डो ने अनुशासन नियमावली के अनुच्छेद 160(1) को जान-बूझकर तोड़ा। परिषद ने उन पर लगे सभी आरोपों को बरकरार रखा।
फिर भी कई सवाल अनुत्तरित हैं। महासंघ ने यह नहीं बताया कि निलंबन का असर किन मुकाबलों या टीम की किन गतिविधियों पर पड़ेगा। यह भी तय नहीं है कि किसी पुराने अंतरिम प्रतिबंध की अवधि को इस सजा में जोड़ा जाएगा या नहीं। ऐसे में पुर्तगाल के अगले मैचों में रोनाल्डो खेल पाएंगे या नहीं, यह अभी साफ नहीं है।
इस बीच रोनाल्डो अपने बर्ताव पर खेद जता चुके हैं। उन्होंने स्वीकार किया था कि नॉर्वे मैच खत्म होने पर वह दर्शकों का धन्यवाद किए बिना और साथी खिलाड़ियों को छोड़कर मैदान से निकल गए थे। उन्होंने यह भी दोहराया कि वह पुर्तगाल के लिए खेलना जारी रखना चाहते हैं। इससे साफ है कि अपने अंतरराष्ट्रीय सफर पर उन्होंने अभी विराम नहीं लगाया है।



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