उत्तर प्रदेश के कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों (KGBV) में कार्यरत संविदा शिक्षकों को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने चार महीने के भीतर नियमित पद और सेवा शर्तें देने का आदेश दिया है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने संविदा शिक्षकों को नियमित करने का आदेश दिया
इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने उत्तर प्रदेश सरकार को निर्देश दिया है कि वह KGBV के शिक्षकों के नियमित पद बनाए और उनकी सेवा शर्तें नियमित शिक्षकों के समान करें। न्यायमूर्ति पंकज भाटिया की एकल पीठ ने यह आदेश देते हुए कहा कि यह व्यवस्था केवल याचिकाकर्ताओं तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि प्रदेश के सभी KGBV शिक्षकों पर लागू होगी।
मासिक 17 हजार रुपये मानदेय देने का आदेश
हाईकोर्ट ने सरकार को तत्काल प्रभाव से सभी KGBV शिक्षकों को 17 हजार रुपये मासिक मानदेय देने का निर्देश दिया है, जब तक कि नियमित पद सृजित नहीं हो जाते। अदालत ने मौजूदा वेतन को अर्द्धकुशल श्रमिकों के लिए निर्धारित पारिश्रमिक से भी कम बताया और इसे ‘‘क्रूर मजाक’’ करार दिया। कोर्ट ने कहा कि शिक्षकों को उचित पारिश्रमिक और सेवा सुरक्षा से वंचित रखना उचित नहीं है।
सरकार को सेवा शर्तें नियमित शिक्षकों के समान बनानी होंगी
कोर्ट ने कहा कि सरकार को KGBV शिक्षकों की सेवा शर्तें निर्धारित करनी होंगी, जो इंटरमीडिएट स्तर के नियमित शिक्षकों के समान हों। याचिकाकर्ताओं की शैक्षिक योग्यता और सेवा अवधि को ध्यान में रखते हुए नियमितीकरण पर निर्णय लेना होगा।
वेतन संशोधन और बच्चों के शिक्षा अधिकार अधिनियम का हवाला
अदालत ने बच्चों के निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा के अधिकार अधिनियम, 2009 की धारा 24(2) के तहत शिक्षकों को सेवा संरक्षण देने की बात कही। साथ ही सरकार को निर्देश दिया गया कि वेतन और मानदेय में समय-समय पर संशोधन करें ताकि वे सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों के शिक्षकों के समान हों।
केंद्र से बजट न मिलने का बहाना स्वीकार नहीं होगा
कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार के बीच वित्तीय जिम्मेदारी पर भी टिप्पणी की। राज्य सरकार को केंद्र से बजट न मिलने का बहाना देकर आदेश का पालन करने से इनकार नहीं करना चाहिए। अदालत ने कहा कि राज्य पहले शिक्षकों को भुगतान कर सकता है और बाद में केंद्र से राशि वसूल सकता है।
कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय योजना क्या है?
कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय योजना केंद्र सरकार की पहल है, जो 2004 में शुरू हुई थी। इसका उद्देश्य पिछड़े और हाशिए पर रहने वाले समुदायों की बालिकाओं को आवासीय विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करना है।
स्रोत: tv9hindi.com



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