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शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2026
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पीतमपुरा में रावण के साथ जला 30 फीट का कॉकरोच, आप की शिकायत पर कपिल मिश्रा का पलटवार

आयोजकों ने इसे गंदगी और बीमारियों के खिलाफ संदेश बताया, जबकि आप ने धार्मिक भावनाएं आहत करने का आरोप लगाकर एफआईआर की मांग की।

पीतमपुरा में रावण के साथ जला 30 फीट का कॉकरोच, आप की शिकायत पर कपिल मिश्रा का पलटवार
पीतमपुरा में दशहरा समारोह के दौरान जलाया गया कॉकरोच का पुतला

दिल्ली में इस बार दशहरे का एक आयोजन राजनीतिक बहस का विषय बन गया। उत्तर-पश्चिम दिल्ली के पीतमपुरा में श्री केशव रामलीला समिति ने रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतलों के साथ 30 फुट ऊंचा कॉकरोच का पुतला भी जलाया। नेताजी सुभाष प्लेस स्थित डीडीए ग्राउंड में हुए इस कार्यक्रम में भारी भीड़ जुटी और दिल्ली सरकार के मंत्री कपिल मिश्रा ने कॉकरोच के पुतले का दहन किया।

आयोजकों के मुताबिक कॉकरोच का पुतला जलाने का मकसद गंदगी और उससे फैलने वाली बीमारियों की ओर ध्यान खींचना था, ताकि लोग अपने घर और आस-पड़ोस को साफ रखने की जिम्मेदारी लें। कार्यक्रम में यह पुतला लोगों के आकर्षण का मुख्य केंद्र बना रहा।

सीजेपी आंदोलन से जोड़ा गया आयोजन

हालांकि इस पुतले को हाल के दिनों में दिल्ली में हुए कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के आंदोलन से भी जोड़कर देखा गया, जिससे आयोजन पर राजनीतिक रंग चढ़ गया। सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने सोशल मीडिया पर आयोजकों का धन्यवाद करते हुए इसे मुफ्त की पब्लिसिटी बताया, वहीं पार्टी की कानूनी मामलों की प्रमुख रत्ना सिंह ने इसे तमाशा कहा।

आम आदमी पार्टी के दिल्ली प्रमुख सौरभ भारद्वाज ने आयोजकों के खिलाफ उपराज्यपाल और दिल्ली पुलिस आयुक्त को शिकायत भेजी है। उन्होंने आरोप लगाया कि आयोजन से जानबूझकर धार्मिक भावनाएं आहत की गईं, पवित्र परंपराओं में बदलाव किया गया और समुदायों के बीच वैमनस्य फैलाने की कोशिश हुई। शिकायत में समिति के अध्यक्ष और भाजपा विधायक तथा मंत्री कपिल मिश्रा समेत अन्य लोगों के नाम शामिल हैं। भारद्वाज ने एफआईआर की मांग करते हुए कहा कि ऐसा न होने पर वे अदालत जाएंगे।

आप की आपत्ति पर कपिल मिश्रा ने तंज कसते हुए कहा कि पुतला कॉकरोच का जल रहा है, लेकिन दर्द देश की राजनीतिक दीमकों को हो रहा है, और जनता ऐसे लोगों के खिलाफ कीटनाशक का काम करती है।

रामलीला और दशहरा जैसे आयोजन परंपरागत रूप से सामाजिक संदेश देने का मंच रहे हैं, लेकिन इस घटना ने दिखाया कि प्रतीकों का इस्तेमाल कब राजनीतिक टकराव में बदल जाता है। अब देखना होगा कि शिकायत पर पुलिस क्या रुख अपनाती है।

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