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गुरुवार, 29 अक्टूबर 2026
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मोहन भागवत बोले- सत्ता बदलने से हालात नहीं बदलते, भारत को तोड़ने की कोशिशें नाकाम होंगी

नागपुर में विजयादशमी संबोधन में आरएसएस प्रमुख ने आंदोलनों के जरिए बदलाव की सोच पर सवाल उठाए और लोगों से सतर्क रहने की अपील की।

मोहन भागवत बोले- सत्ता बदलने से हालात नहीं बदलते, भारत को तोड़ने की कोशिशें नाकाम होंगी
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत संवाददाताओं को संबोधित करते हुए (फाइल फोटो) (फोटो: vishal dutta photo's, विकिमीडिया कॉमन्स, CC BY 2.0)

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने मंगलवार को नागपुर में संघ के वार्षिक विजयादशमी कार्यक्रम में कहा कि भारत को तोड़ने के प्रयास कभी सफल नहीं होंगे। उन्होंने यह धारणा गलत बताई कि सत्ता बदल देने से परिस्थितियां बदल जाती हैं और कहा कि ऐसा न पहले कभी हुआ है, न आगे होगा।

भागवत की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ एसआईआर (स्पेशल इंटेंसिव रिविजन) में कथित अपारदर्शिता को लेकर विरोध-प्रदर्शन जारी हैं। संघ प्रमुख ने कहा कि आंदोलनों से वास्तविक बदलाव नहीं आता और समस्याओं का हल समाज के भीतर से ही निकलना चाहिए। उन्होंने आगाह किया कि जब प्रदर्शन राजनीतिक होते हैं या भड़काए जाते हैं, तो उनका इस्तेमाल तनाव, अराजकता और सार्वजनिक व्यवस्था बिगाड़ने के लिए किया जाता है।

'पश्चिम से आ रहा तूफान'

भागवत ने कहा कि दुनिया में कई ताकतें चाहती हैं कि भारत पिछड़ जाए, क्योंकि पिछले कुछ दशकों में निर्णायक नीतियों के बल पर देश तेजी से आगे बढ़ा है। उन्होंने पश्चिम से आ रहे एक ऐसे 'तूफान' का जिक्र किया, जो उनके अनुसार संस्कृति, व्यवस्था और सुरक्षा से नफरत करता है। उन्होंने फ्रांस, बांग्लादेश और नेपाल का उदाहरण दिया, जहां हाल के वर्षों में सरकारों के खिलाफ बड़े आंदोलन हुए। साथ ही कहा कि भारत में भी कुछ लोग ऐसे विचारों से सहमत दिखते हैं, जिनमें उनके शब्दों में समझ कम और सत्ता की लालसा ज्यादा है।

संबोधन में भागवत ने 'वंदे मातरम' को बंगाल में एकता के प्रतीक के रूप में याद किया। उन्होंने कहा कि जब लॉर्ड कर्जन ने धार्मिक आधार पर बंगाल को बांटने की कोशिश की, तो समाज ने उसका डटकर विरोध किया और ब्रिटिश सरकार को फैसला वापस लेना पड़ा, लेकिन 1947 में विभाजन इसलिए नहीं रुक सका क्योंकि लोग आपसी मतभेदों में उलझ गए थे।

इस कार्यक्रम में एक प्रमुख हिंदी दैनिक के प्रधान संपादक संजय गुप्त मुख्य अतिथि थे, जबकि पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ भी मौजूद रहे। आरएसएस की स्थापना 1925 में विजयादशमी के दिन डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने नागपुर में की थी।

भागवत का बयान वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण के उस कथन के कुछ दिन बाद आया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि एसआईआर के खिलाफ आंदोलन अब सत्ता परिवर्तन की लड़ाई बन गया है। भाजपा ने भूषण के बयान की तीखी आलोचना की थी।

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