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बुधवार, 28 अक्टूबर 2026
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निर्वाचन आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में किया फॉर्म-6 और ECINet आरोपों का खंडन

निर्वाचन आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में फॉर्म-6 और ECINet से जुड़े आरोपों को खारिज करते हुए सभी फैसलों में सर्वसम्मति होने की बात कही।

निर्वाचन आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में किया फॉर्म-6 और ECINet आरोपों का खंडन

निर्वाचन आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में जवाबी हलफनामा दाखिल कर फॉर्म-6 में बदलाव और ECINet सॉफ्टवेयर से जुड़ी सभी शिकायतों को खारिज किया है। आयोग ने बताया कि सभी अहम आदेश मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों की सर्वसम्मति से लिए गए हैं और मतदाता सूची में नाम जोड़ने-घटाने का अधिकार संबंधित अधिकारी के पास है।

सर्वसम्मति से लिए गए आदेश

निर्वाचन आयोग ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से जुड़े जून 2025, अक्टूबर 2025 और मई 2026 के तीनों आदेश सभी सदस्यों की सहमति से मंजूर किए गए थे। जवाबी हलफनामे को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू तथा विवेक जोशी ने मंजूरी दी है। आयोग ने यह स्पष्ट किया कि फाइलों पर किसी आयुक्त की टिप्पणी अंतिम निर्णय नहीं होती और सामान्य प्रक्रिया में फाइलें एक-एक करके सभी आयुक्तों के पास भेजी जाती हैं।

फॉर्म-6 में बदलाव के आरोपों का खंडन

निर्वाचन आयोग ने बताया कि मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने के लिए प्रयुक्त फॉर्म-6 में कोई संशोधन नहीं किया गया है। आयोग के अनुसार, फॉर्म में बदलाव का अधिकार केवल केंद्र सरकार के पास है। SIR प्रक्रिया के लिए जो घोषणा-पत्र जोड़ा गया वह अलग दस्तावेज है। आयोग ने माना कि ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया में फॉर्म-6 और घोषणा-पत्र को एक साथ दिखाने से भ्रम हो सकता था, इसलिए 21 अक्टूबर से इन्हें अलग-अलग दिखाने का प्रावधान किया जाएगा।

मतदाता सूची और ECINet संबंधी जानकारी

निर्वाचन आयोग ने बताया कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने या हटाने का निर्णय संबंधित निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ERO) का होता है। आयोग ने ECINet सॉफ्टवेयर से जुड़ी जानकारी RTI के तहत देने से इनकार किया है, इसे व्यावसायिक गोपनीयता, व्यापार रहस्य और बौद्धिक संपदा से जुड़ा बताया गया है। आयोग ने यह भी कहा कि SIR के लिए कोई नया सॉफ्टवेयर विकसित या खरीदा नहीं गया था।

आंतरिक दस्तावेज मीडिया को न देने का फैसला

निर्वाचन आयोग ने मीडिया को आंतरिक नोट्स या फाइलें जारी करने के आरोपों को खारिज किया है। आयोग ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त को केवल संवैधानिक प्रक्रिया से हटाया जा सकता है और उनकी कार्यवाही को रोकने वाली याचिका की वैधता भी सवालों के घेरे में है।

सुप्रीम कोर्ट की भूमिका और आगामी कदम

दशहरा अवकाश के कारण आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में संक्षिप्त जवाब दाखिल किया है और विस्तृत जवाब देने की अनुमति मांगी है। सुप्रीम कोर्ट मामले का अंतिम फैसला संबंधित रिकॉर्ड की पड़ताल के बाद सुनाएगी कि आयोग के फैसले कानून के अनुरूप हैं या नहीं।

राजनीतिक प्रतिक्रियाएं

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने ECINet से जानकारी न मिलने पर आयोग की आलोचना की है। उन्होंने कहा कि पारदर्शिता की कमी से पूरे चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता प्रभावित हुई है। उन्होंने सोशल मीडिया पर दावा किया कि आयोग जानकारी छुपा रहा है क्योंकि इससे कथित केंद्रीकृत हेरफेर का खुलासा हो सकता है।

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