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गुरुवार, 29 अक्टूबर 2026
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सीजेपी नेताओं की याचिका पर हाईकोर्ट का सवाल- अनुमति नहीं थी तो जंतर-मंतर क्यों गए?

सौरव दास और आशुतोष रांका ने न्यायिक हिरासत बढ़ाने के विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट के आदेश को चुनौती दी है; अदालत ने बैरिकेड तोड़ने पर चिंता जताई।

सीजेपी नेताओं की याचिका पर हाईकोर्ट का सवाल- अनुमति नहीं थी तो जंतर-मंतर क्यों गए?
सीजेपी नेता सौरव दास और आशुतोष रांका

कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेता सौरव दास और आशुतोष रांका की न्यायिक हिरासत से जुड़ी याचिका पर बुधवार को दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। जस्टिस सुब्रमणियम प्रसाद की पीठ के सामने दोनों नेताओं ने विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट (एसईएम) के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसके जरिए जंतर-मंतर पर बिना अनुमति प्रवेश के मामले में उनकी न्यायिक हिरासत बढ़ाई गई थी।

दोनों नेता 13 अक्तूबर को जंतर-मंतर की ओर निकाले गए मार्च के दौरान हिरासत में लिए गए थे और तब से न्यायिक हिरासत में हैं। बढ़ाई गई हिरासत की अवधि बुधवार को ही खत्म हो रही थी। सुनवाई में दिल्ली पुलिस की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा और अधिवक्ता आशीष दीक्षित ने पक्ष रखा, जबकि याचिकाकर्ताओं की तरफ से वकील अभिक चिमनी पेश हुए।

अदालत ने क्या कहा

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने सीजेपी के प्रदर्शन में कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका और बैरिकेड तोड़ने जैसी घटनाओं के संभावित नतीजों पर चिंता जाहिर की। अदालत ने कहा कि दोनों याचिकाकर्ता इस आंदोलन में सबसे आगे हैं और जब नेतृत्व करने वाले लोग बैरिकेड तोड़ते हैं, तो इस बात का खतरा रहता है कि उनके पीछे 10-20 और लोग भी वैसा ही करने लगें, जिन पर किसी का नियंत्रण नहीं रहता।

पीठ ने याचिकाकर्ताओं के वकील से सीधा सवाल किया कि जब जंतर-मंतर पर जाने की इजाजत ही नहीं थी, तो वहां जाने की जरूरत क्यों पड़ी। अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि दूसरे देशों में भी देखा गया है कि आंदोलन शांतिपूर्ण ढंग से शुरू हुए, लेकिन बाद में हालात कहीं और पहुंच गए।

सुनवाई में एक कानूनी प्रश्न भी उठा। अदालत ने जानना चाहा कि क्या विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट का यह आदेश ऐसी श्रेणी में आता है, जिसकी पुनरीक्षण याचिका के जरिए समीक्षा की जा सकती है। दोनों नेताओं ने अपनी दलीलों में हिरासत बढ़ाने के आदेश के आधार पर ही सवाल खड़े किए हैं।

गौरतलब है कि मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ एसआईआर प्रक्रिया में कथित अपारदर्शिता को लेकर चल रहे सीजेपी के आंदोलन ने राष्ट्रीय राजनीति में हलचल मचा रखी है। दोनों नेताओं की हिरासत को लेकर विपक्षी दल लगातार सरकार और पुलिस पर सवाल उठा रहे हैं, जबकि भाजपा इसे कानून-व्यवस्था का मामला बता रही है। ऐसे में हाईकोर्ट का अंतिम रुख इस पूरे विवाद की दिशा तय करने में अहम माना जा रहा है।

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