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बुधवार, 28 अक्टूबर 2026
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मणिपुर: सुनुलोक पहाड़ी हमले में तीन गिरफ्तार, हथियार-विस्फोटक बरामद; कांगपोकपी में बंद

जलावन लकड़ी बीन रहे लोगों पर हुई गोलीबारी में तीन की मौत के बाद पुलिस ने कार्रवाई की, वहीं कामजोंग के एक खाली गांव में घरों को आग लगा दी गई।

मणिपुर: सुनुलोक पहाड़ी हमले में तीन गिरफ्तार, हथियार-विस्फोटक बरामद; कांगपोकपी में बंद
प्रतीकात्मक तस्वीर: मणिपुर में इंफाल के पास खेतों और पहाड़ियों का दृश्य (फोटो: Jakfoto Productions, विकिमीडिया कॉमन्स, CC BY-SA 2.0)

मणिपुर पुलिस ने सुनुलोक पहाड़ी इलाके में हुए हमले के सिलसिले में तीन आरोपियों को पकड़ा है। यह इलाका इंफाल पूर्वी और कांगपोकपी जिलों की सीमा पर है, जहां हुई फायरिंग में तीन लोग मारे गए थे और तीन जख्मी हुए थे। एडीजीपी लहरी दोर्जी खाटू के मुताबिक गिरफ्तार लोगों के कब्जे से हथियारों के साथ विस्फोटक भी बरामद हुए हैं।

अधिकारियों के अनुसार सोमवार को जंगल में जलावन की लकड़ियां इकट्ठा कर रहे लोगों के एक समूह पर कथित उग्रवादियों ने अचानक गोलियां चला दी थीं। इसी हमले में तीन मैतेई नागरिकों की मौत हुई थी। इस घटना के बाद से इलाके में तनाव बना हुआ है और सुरक्षा बल लगातार निगरानी कर रहे हैं।

खाली पड़े गांव में घरों को लगाई आग

इसी बीच बुधवार तड़के कामजोंग जिले में चस्साद गांव के पास बसे खोइखाई कुकी गांव में संदिग्ध उग्रवादियों ने कई घरों में आग लगा दी। पुलिस ने बताया कि यह घटना सुबह करीब साढ़े पांच बजे हुई। कुकी और नागा समुदायों के बीच बढ़ते टकराव के कारण यहां के ग्रामीण पहले ही अपने घर छोड़कर जा चुके थे, इसलिए गांव खाली था। नुकसान का आकलन और आरोपियों की पहचान अभी नहीं हो सकी है।

इस वर्ष की शुरुआत से राज्य में दोनों आदिवासी समुदायों के बीच हिंसा में 50 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और दर्जनों मकान जलाए जा चुके हैं। तमेंगलोंग, नोनी, कांगपोकपी, उखरुल और कामजोंग जिले इस हिंसा से सबसे ज्यादा प्रभावित बताए गए हैं।

उधर कुकी-जो बहुल कांगपोकपी जिले में कमेटी ऑन ट्राइबल यूनिटी (सीओटीयू) ने 20 अक्टूबर की आधी रात से 21 अक्टूबर की आधी रात तक 24 घंटे के पूर्ण बंद का एलान किया। आपात चिकित्सा सेवाओं को इससे छूट दी गई है। संगठन ने अपने बयान में मैतेई नागरिकों की हत्या के मामले में कुकी-जो समुदाय के लोगों की कथित अंधाधुंध गिरफ्तारी पर चिंता जताई और निष्पक्ष जांच की मांग की।

सीओटीयू ने दावा किया कि हिंसा में कुकी-जो समुदाय के 32 लोगों की मौत हुई, 30 गांव जलाए गए, 271 मकान नष्ट हुए और 2,516 लोगों को घर छोड़ना पड़ा। संगठन ने बंद को न्याय, जवाबदेही और सुरक्षा की मांग से जुड़ा शांतिपूर्ण विरोध बताया है।

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