भारतीय रुपये ने अमेरिकी डॉलर के मुकाबले लगातार आठवें कारोबारी सत्र में बढ़त दर्ज की है। बुधवार, 21 अक्तूबर को शुरुआती कारोबार में रुपया 29 पैसे मजबूत होकर 94.62 प्रति डॉलर तक पहुंच गया। अंतरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया 94.78 पर खुला और फिर इसमें और मजबूती आई। सोमवार को यह 94.91 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था, जबकि मंगलवार को दशहरे के कारण मुद्रा बाजार बंद रहा।
जियो आईपीओ का असर
रुपये की मजबूती की एक प्रमुख वजह जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ से जुड़ा विदेशी निवेशकों का डॉलर प्रवाह है। यह आईपीओ बुधवार को खुला है। विश्लेषकों के अनुसार आईपीओ आवंटन प्रक्रिया के दौरान विदेशी निवेशक डॉलर बेचकर रुपये जुटा रहे हैं, जिससे घरेलू बाजार में डॉलर की आवक बढ़ी है।
चॉइस ब्रोकिंग के कमोडिटी और करेंसी विश्लेषक आमिर मकदा ने बताया कि विदेशी निवेशक बड़े पैमाने पर 'सेल-बाय स्वैप' का इस्तेमाल कर रहे हैं। इसमें स्पॉट बाजार में डॉलर बेचकर रुपये लिए जाते हैं और तय अवधि के बाद डॉलर वापस खरीदने का करार होता है, जिसकी अवधि आमतौर पर एक सप्ताह से कम होती है। उनके मुताबिक रिजर्व बैंक के कदमों ने भी रुपये को मजबूती दी। बुधवार को डॉलर की मांग सीमित रखने में आरबीआई के समर्थन को भी तेजी की वजह माना गया।
हालांकि दबाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड वायदा 1.42 फीसदी चढ़कर 110.33 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए तेल महंगा होने पर आयातकों को डॉलर खरीदने के लिए ज्यादा रुपये खर्च करने पड़ते हैं। छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की ताकत मापने वाला डॉलर इंडेक्स बुधवार को 0.06 फीसदी बढ़कर 101.58 पर था। इससे पहले मंगलवार को यह करीब 0.2 फीसदी गिरकर तीन सप्ताह के निचले स्तर पर आ गया था।
आमिर मकदा का अनुमान है कि बुधवार को रुपया 94.00 से 94.75 प्रति डॉलर के दायरे में रह सकता है, लेकिन आगे की दिशा विदेशी निवेश, आरबीआई के कदमों और कच्चे तेल पर निर्भर करेगी। फिनरेक्स के मुताबिक 94.73 का स्तर आयातकों के लिए नजदीकी अवधि में डॉलर खरीदने का अच्छा मौका हो सकता है, जबकि निर्यातकों को डॉलर बेचने या हेजिंग के लिए 94.95 के स्तर का इंतजार करने की सलाह दी गई है। फिनरेक्स ने आयातकों को फिलहाल अक्तूबर की जरूरत भर की खरीदारी करने का सुझाव दिया है।



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