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बुधवार, 28 अक्टूबर 2026
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नशा-मुक्त भारत 2029: लक्ष्य स्वागतयोग्य, पर रास्ता केवल पुलिसिंग से नहीं निकलेगा

गृह मंत्री ने पुलिस स्मृति दिवस पर 31 दिसंबर 2029 तक देश को नशे से मुक्त करने का लक्ष्य रखा है; इसके लिए समाज, स्वास्थ्य तंत्र और राज्यों की साझा भागीदारी जरूरी है।

नशा-मुक्त भारत 2029: लक्ष्य स्वागतयोग्य, पर रास्ता केवल पुलिसिंग से नहीं निकलेगा
प्रतीकात्मक तस्वीर: दिल्ली में बैरिकेड के पास तैनात पुलिसकर्मी (फोटो: P0908ih, विकिमीडिया कॉमन्स, CC BY-SA 3.0)

पुलिस स्मृति दिवस पर राष्ट्रीय पुलिस स्मारक से केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 31 दिसंबर 2029 तक भारत को नशा-मुक्त बनाने का लक्ष्य घोषित किया है। उन्होंने देशभर के पुलिस बलों से 2026 के बाकी महीनों और अगले तीन वर्षों में नशीले पदार्थों के खिलाफ एकजुट लड़ाई की अपील की। एक स्पष्ट समयसीमा तय करना इस बात का संकेत है कि सरकार इस समस्या को गंभीर राष्ट्रीय चुनौती मान रही है, और यह स्वागतयोग्य है।

गृह मंत्री ने ठीक ही कहा कि नशे का खतरा आने वाली पीढ़ियों को नुकसान पहुंचाता है, अर्थव्यवस्था पर अनावश्यक बोझ डालता है और देश विरोधी गतिविधियों में लगे संगठनों को आर्थिक मदद देता है। सीमावर्ती राज्यों से लेकर महानगरों तक नशे का जाल जिस तरह फैला है, उसे देखते हुए यह चिंता किसी एक राज्य या दल की नहीं, पूरे देश की है।

आपूर्ति के साथ मांग पर भी चोट जरूरी

लेकिन अनुभव बताता है कि नशे के खिलाफ लड़ाई केवल जब्ती और गिरफ्तारी के आंकड़ों से नहीं जीती जाती। तस्करी के नेटवर्क तोड़ना जरूरी है, पर उतना ही जरूरी है उस मांग को कम करना जो युवाओं को इस दलदल में खींचती है। इसके लिए स्कूल-कॉलेजों में जागरूकता, परिवारों की भागीदारी, खेल और रोजगार के अवसर तथा सुलभ नशा मुक्ति केंद्र उतने ही अहम हैं जितनी पुलिस की सख्ती।

नशे के आदी व्यक्ति को अपराधी के बजाय मरीज की तरह देखने की दृष्टि भी जरूरी है। अगर उपचार और पुनर्वास की व्यवस्था मजबूत नहीं होगी तो जेल से लौटे लोग फिर उसी चक्र में फंस सकते हैं। केंद्र और राज्यों के स्वास्थ्य विभागों, सामाजिक संगठनों और पुलिस के बीच बेहतर तालमेल ही इस लक्ष्य को व्यावहारिक बना सकता है।

गृह मंत्री ने यह भी बताया कि आजादी के बाद से अब तक 36,852 पुलिसकर्मी ड्यूटी के दौरान शहीद हुए हैं, जिनमें इस वर्ष के 154 जवान शामिल हैं। 21 अक्टूबर 1959 को लद्दाख के हॉट स्प्रिंग्स में चीनी सैनिकों के हमले में दस पुलिसकर्मियों के बलिदान की याद में यह दिवस मनाया जाता है। यह याद दिलाता है कि कानून-व्यवस्था की हर बड़ी लड़ाई की कीमत जवान चुकाते हैं।

नशा-मुक्त भारत का लक्ष्य तभी पूरा होगा जब पुलिस बलों को आधुनिक संसाधन, खुफिया तंत्र और प्रशिक्षण मिले और साथ ही समाज इस अभियान को अपना माने। समयसीमा महत्वाकांक्षी है; इसकी सफलता का पैमाना केवल जब्ती नहीं, बल्कि नशे से बाहर आए युवाओं की संख्या होनी चाहिए। इसके लिए नियमित और पारदर्शी समीक्षा भी उतनी ही जरूरी होगी।

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