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बुधवार, 28 अक्टूबर 2026
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नेहा बोरा के शांति बॉन्ड नोटिस पर दिल्ली हाईकोर्ट में बहस, फैसला सुरक्षित

नेहा बोरा ने 10,000 रुपये के शांति बॉन्ड नोटिस को दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी, कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा।

नेहा बोरा के शांति बॉन्ड नोटिस पर दिल्ली हाईकोर्ट में बहस, फैसला सुरक्षित
नेहा बोरा के शांति बॉन्ड नोटिस पर दिल्ली हाईकोर्ट में बहस, फैसला सुरक्षित

दिल्ली हाई कोर्ट में नेहा बोरा द्वारा 10,000 रुपये के शांति बॉन्ड नोटिस को चुनौती दी गई। उनके वकील ने कहा कि लोकतंत्र में सत्ता परिवर्तन की मांग करना गलत नहीं है, जबकि पुलिस ने इसे उपद्रव बताया। कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया है।

नेहा बोरा ने शांति बॉन्ड नोटिस को दिया चुनौती

ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की अध्यक्ष नेहा बोरा की याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट में गुरुवार को सुनवाई हुई। नेहा बोरा ने दिल्ली पुलिस के उस नोटिस को चुनौती दी है, जिसमें उन्हें 10,000 रुपये का पीस बॉन्ड भरने के लिए कहा गया था। यह नोटिस नई दिल्ली जिले के स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (SEM) की ओर से 17 अक्टूबर को जारी किया गया था, इसी दिन नेहा को रिहा किया गया था। नेहा को 16 अक्टूबर को विरोध प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिया गया था। नोटिस में उन्हें मजिस्ट्रेट के सामने पेश होने और एक जमानतदार के साथ 10,000 रुपये का पर्सनल बॉन्ड भरने का निर्देश दिया गया था।

नेहा के वकील गोपाल शंकरनारायणन ने कहा कि लोकतंत्र में सत्ता परिवर्तन की मांग करना गलत नहीं है। इस पर पुलिस की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने कहा कि सरकार बदलने का फैसला चुनाव में वोटों के जरिए होना चाहिए, न कि कुछ उपद्रवी तत्वों के दबाव में। उन्होंने यह भी कहा कि नोटिस सार्वजनिक शांति बनाए रखने के लिए एहतियाती कदम था।

दिल्ली पुलिस ने उल्लंघनों का दिया हवाला

ASG चेतन शर्मा ने अदालत को बताया कि नोटिस जारी करने से पहले अधिकारियों ने उपलब्ध सभी सामग्री का पूरा आकलन किया था। उन्होंने कहा कि पुलिस सब-इंस्पेक्टर से मिली जानकारी, पुरानी FIR और मौजूदा स्थिति को ध्यान में रखते हुए मजिस्ट्रेट के सामने पूरा रिकॉर्ड रखा गया।

उन्होंने आरोप लगाया कि नेहा बोरा ने बार-बार पाबंदियों का उल्लंघन किया है और इसके समर्थन में 12 मामले प्रस्तुत किए गए हैं। पुलिस ने यह भी कहा कि नेहा ऐसी सभा में शामिल थीं, जिसमें ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के नेता और एक्टिविस्ट प्रशांत भूषण के साथ सत्ता परिवर्तन की मांग की गई थी।

शर्मा ने नेहा के इस दावे का खंडन किया कि संबंधित इलाके में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत कोई निषेधाज्ञा लागू नहीं थी। उन्होंने कहा कि पुलिसकर्मियों की संख्या कम होने के बावजूद नेहा को रोकने पर वे नहीं रुकीं।

नेहा बोरा ने मौलिक अधिकारों के उल्लंघन का लगाया आरोप

नेहा बोरा की ओर से वकील अभिक चिमनी ने याचिका दायर की, जिसमें नोटिस को अस्पष्ट और तथ्यात्मक रूप से गलत बताया गया है। उनका कहना है कि नोटिस में शांति भंग होने की आशंका का कोई ठोस आधार नहीं है और न ही किसी समय, स्थान या घटना का स्पष्ट उल्लेख है।

उन्होंने दावा किया कि नोटिस संविधान के अनुच्छेद 19 और 21 के तहत नेहा के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता है। नेहा के वकील शंकरनारायणन ने कहा कि नेहा 16 अक्टूबर को कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में CJP के प्रदर्शन में शामिल नहीं थीं, बल्कि मंडी हाउस में अलग प्रदर्शन कर रही थीं।

पुलिस के नोटिस में मंडी हाउस में नारेबाजी, निषेधाज्ञा के बावजूद जंतर-मंतर के पास बार-बार प्रदर्शन और लोगों को कनॉट प्लेस के प्रदर्शन में शामिल होने के लिए उकसाने के आरोप लगाए गए थे।

मंडी हाउस मार्च और गिरफ्तारी

16 अक्टूबर को नेहा बोरा ने AISA कार्यकर्ताओं के साथ मंडी हाउस से फ्लैग मार्च निकाला था। वे वोटिंग सिस्टम में गड़बड़ियों के आरोपों को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रही थीं।

पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया और लगभग 12 घंटे बाद 17 अक्टूबर की सुबह 6 बजे रिहा किया गया। यह घटनाक्रम CJP के विरोध प्रदर्शनों के दौरान हुआ था। पार्टी के सह-संयोजक सौरव दास और आशुतोष रांका को जंतर-मंतर पर राष्ट्रीय ध्वज फहराने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था।

कोर्ट का फैसला सुरक्षित

सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद जस्टिस प्रसाद की बेंच ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। कोर्ट ने कहा कि आदेश शुक्रवार शाम 6 बजे सुनाया जाएगा।

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