दिल्ली विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ ओपन लर्निंग (एसओएल) में पढ़ने वाले लाखों विद्यार्थियों के लिए राहत की खबर है। दिल्ली विकास प्राधिकरण यानी डीडीए ने ताहिरपुर में एसओएल के नए परिसर के लिए 50 एकड़ जमीन आवंटित की है। इस परिसर के बनने से कक्षाओं और परीक्षाओं की क्षमता बढ़ेगी और नियमित कॉलेजों पर निर्भरता कम होगी।
योजना के अनुसार नया परिसर दो साल में तैयार किया जाएगा। निर्माण का बजट केंद्रीय लोक निर्माण विभाग यानी सीपीडब्ल्यूडी से तैयार कराया जाएगा। यहां बड़े हॉल बनाए जाने की योजना है, ताकि एक साथ बड़ी संख्या में छात्रों की कक्षाएं और परीक्षाएं कराई जा सकें।
हर साल 1.30 लाख से ज्यादा दाखिले
कैंपस ऑफ ओपन लर्निंग की निदेशक पायल मागो ने बताया कि हर साल स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर पर 1.30 लाख से अधिक छात्र एसओएल में दाखिला लेते हैं। नए केंद्र से दिल्ली-एनसीआर के विद्यार्थियों को सीधा लाभ मिलेगा और संस्थान की कक्षाएं तथा परीक्षाएं संचालित करने की क्षमता बढ़ेगी।
यह केंद्र मुख्य रूप से पूर्वी दिल्ली, उत्तर-पूर्वी दिल्ली, दक्षिणी दिल्ली, वैशाली, गाजियाबाद और साहिबाबाद से दाखिला लेने वाले छात्रों के लिए होगा। इन इलाकों के विद्यार्थियों को अब कक्षाओं के लिए मुख्य या दूसरे केंद्रों तक लंबा सफर नहीं करना पड़ेगा।
एसओएल के अभी पश्चिमी, दक्षिणी, उत्तरी और पूर्वी दिल्ली में केंद्र हैं। ताहिरपुर में बनने वाला नया केंद्र पूर्वी दिल्ली में संस्थान का दूसरा केंद्र होगा। ताहिरपुर में पहले से ही 50 एकड़ जमीन पर एसओएल का सात मंजिला आधुनिक हरित परिसर मौजूद है, जिस पर करीब 40 करोड़ रुपये खर्च हुए थे। वहां श्रव्य-दृश्य प्रयोगशालाएं, आधुनिक लैब और कक्षाओं की सुविधा है। बीते साल शुरू हुए इस केंद्र में करीब चार हजार छात्र सुबह और शाम की पाली में पढ़ाई करते हैं।
मुक्त शिक्षा उन विद्यार्थियों के लिए अहम विकल्प है जो नौकरी, पारिवारिक जिम्मेदारी या दूसरी वजहों से नियमित कॉलेज नहीं जा पाते। हालांकि नए परिसर के पूरी तरह तैयार होने और वहां कक्षाएं शुरू होने में अभी समय लगेगा। अगर दो साल की समयसीमा में काम पूरा होता है तो दिल्ली-एनसीआर के छात्रों को बड़ी सुविधा मिलेगी।



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